दंगे की आग में ज़िंदा जल गईं 85 साल की बूढ़ी माँ

विभव देव शुक्ला

राजधानी दिल्ली में जारी हिंसा ने बहुत बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। अभी तक हालात सामान्य करने की जद्दोजहद जारी है लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हुए उपद्रव की सबसे बड़ी कीमत चुकाई आम लोगों ने। ऐसे आम लोग जिनका पूरी घटना से कोई लेना-देना ही नहीं था।
जो न तो पहली तरफ थे और न ही दूसरी तरफ। यही आम लोग घायल हुए और इन्हीं आम लोगों ने अपनी जान भी गंवाई। दंगा करने वालों ने और हिंसा भड़काने वालों ने न तो बच्चों को बख्शा और न ही बुजुर्गों को, सभी इनकी चपेट में आए।

पूरा घर जला दिया गया
पूरे घटना के दौरान दिल्ली के एक इलाके में हालात लगातार बदतर बने हुए थे। उत्तर पूरी दिल्ली में स्थित खजूरी खास इलाके में गम्हरी एक्सटेंशन के पास एक घर में आग लगा दी गई। आग इतने भीषण तरीके से लगाई गई कि पूरा घर खाक हो गया और इस दौरान घर के भीतर 85 साल की वृद्धा अकबरी मौजूद थीं। आग के चलते वह भी पूरी की पूरी ज़िंदा जल गईं।
अकबरी के बेटे मोहम्मद सईद सलमानी ने एक समाचार समूह से बात करते हुए घटना की जानकारी दी। सईद ने बताया ‘मंगलवार के दिन मैं कुछ सामान लेने के लिए निकला था और तब तक मुझे इस तरह की किसी भी बात का अंदाज़ा नहीं था। मैं जैसे ही सामान लेकर वापस आया मैंने देखा कि मोहल्ले के भीतर लगभग 100 से 150 लोग मौजूद थे।’

कई घर जलाए जा चुके हैं
उनमें से कुछ लोगों ने मेरे घर का दरवाजा तोड़ कर पूरे घर में आग लगा दी थी। मेरी पत्नी और बच्चे किसी तरह अपनी जान बचा कर छत पर भाग गए थे लेकिन मेरी माँ ऐसा नहीं कर पाईं। क्योंकि उनकी उम्र ज़्यादा थी और उन्हें चलने में परेशानी भी होती थी। घर के अंदर ही मेरी कपड़ों की दुकान थी, वह पूरी की पूरी जल कर राख़ हो चुकी है, ठीक इसी तरह मोहल्ले के कई घर जलाए जा चुके हैं।

पुलिस की तरफ से कोशिशें जारी
दिल्ली में जारी हिंसा में अब तक लगभग 30 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 200 लोग घायल हुए हैं। इसमें दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और इंटेलिजेंस ब्यूरो के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा भी शामिल हैं। फिलहाल दिल्ली के तमाम इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है लेकिन अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। पुलिस और तमाम सुरक्षा बल दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में शांति मार्च निकाल रहे हैं जिससे हालात सुधारे जा सकें।

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