7वीं कक्षा की इस बच्ची ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को अपना मुरीद बना लिया

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। महज 13 साल की नन्हीं उम्र और काम इतने बड़े की नम्या ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को अपना मुरीद बना लिया है। हाल ही में इंडिया आए माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला लुधियाना की 13 वर्षीय स्टूडेंट नम्या जोशी की असाधारण प्रतिभा से प्रभावित हुए।

नडेला ने जमकर नम्या की तारीफ की और कहा कि इस बच्ची ने मुझे काफी प्रेरित व प्रभावित किया। वह यहां तक बोल गए कि मन करता है कि मैं दोबारा से मिडिल स्कूल में जाकर पढ़ूं।

नडेला ने तारीफ़ करते हुए आगे कहा, “भारत में इस हफ्ते मैं कई यंग इनोवेटर्स से मिला। इनमें नम्या जोशी भी शामिल हैं जो पूरी दुनिया के टीचर्स को सिखा रही हैं कि माइनक्राफ्ट को सीखने में कैसे इस्तेमाल किया जाए। इनकी सहानुभूति, जज्बा, और लगन दुनिया को बेहतर बनाएंगे।”

मौका था दिल्ली में आयोजित हुए यूथ इनोवेटर समिट का यानी कम उम्र के आविष्कारकों का एक सम्मेलन। जिसमें सत्या नडेला ने देश भर के मेधावी छात्र-छात्राओं, अध्यापकों, प्रिंसिपल, अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशन के लीडर व सीईओ से मुलाकात की।

इस 13 साल की बच्ची ने ऐसा क्या किया है?

लुध‍ियाना स्थित स्कूल की कक्षा 7 वीं की छात्रा नम्या अपने शिक्षकों को कक्षा के पाठों को माइनक्राफ्ट सत्रों में बदलने में मदद कर रही हैं। नम्या ने सत्य नडेला के सामने फन के साथ टेक्नोलॉजी को सीखने की कला बताई। बच्ची ने इनोवेशन में माइन क्राफ्ट के जरिए पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए हर सब्जेक्ट में गेम्स से जोड़कर लेसन बनाए। नम्या ने आर्ट्स, कंप्यूटर, हिस्ट्री, मैथ्स, बायोलॉजी में लेसन तैयार किए हैं। इसके अलावा वर्चुअल लाइब्रेरी भी बनाई है।

नम्या लुधियाना के सत पॉल मित्तल स्कूल में पढ़ती हैं। ये स्कूल पंजाब का नंबर वन को-एड डे स्कूल है, ऐसा EW इंडिया की स्कूल रैन्किंग्स कहती हैं। उन्होंने माइनक्राफ्ट नाम के खेल में महारत हासिल कर ली है। नम्या की मां मोनिका जोशी लुधियाना के सेंट पॉल मित्तल स्कूल में आईटी हेड हैं। मोनिका ने दो साल पहले माइक्रोसॉफ्ट इनोवेटिव एजुकेटर प्रोग्राम के हिस्से के रूप में ग्लोबल माइनक्राफ्ट मेंटर बनने के लिए साइन किया था।

इसी दौरान एक दिन मोनिका जोशी ने नम्या को माइनक्राफ्ट एजुकेशन एडिशन के साथ खेलते हुए पाया। इसके बाद, जोशी ने अपनी बेटी को माइनक्राफ्ट की दुनिया में और भी जानने को कहा। परिणाम ये हुआ ये कि नम्या ने अपने स्कूल में माइनक्राफ्ट का इस्तेमाल करने की बात कही।

नम्या ने पिछले ही महीने एक इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने कहा था, “मैं एक सख्त टाइमटेबल फॉलो करती हूं। रोज़ माइनक्राफ्ट के लेसंस तैयार करने के लिए 30 मिनट लगाती हूं। सभी को क्वॉलिटी एजुकेशन दिलाने में गेमिफिकेशन (पढ़ाई में खेलों की मदद लेना) काफी सहयोग दे सकता है। आने वाले कुछ सालों में मेरा ये प्लान है कि मैं अपने तकनीकी कौशल को बेहतर करूं, और कई तरह के टॉपिक्स पर लेसन बनाऊं। मेरा सपना है कि मैं बड़ी तकनीकी कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के साथ काम करूं और स्कूली एजुकेशन को तकनीकी आविष्कारों की मदद से बेहतर बनाऊं।”

इससे पहले 25 फरवरी को बेंगलुरू में हुए फ्यूचर डिकोडेड सीईओ सम्मेलन में भी सत्य नडेला ने अपने डेवलपर्स के समक्ष के नाम्या जोशी की जमकर तारीफ की थी। फिनलैंड में एक ग्लोबल एजुकेशन समिट KEOS2019 में नम्या ने अपनी बात रखी थी। यहां उन्होंने शिक्षकों के लिए एक कार्यशाला भी आयोजित की थी। फिर उन्होंने दिसंबर 2018 में राष्ट्रीय माइनक्राफ्ट प्रतियोगिता भी जीती थी।

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