जब प्रेग्नेंट शबाना पर हुआ हमला तो संजीव ने लिया दंगाइयों से बचाने का जिम्मा

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। ‘भीड़ ने मुझे लाठियों से पीटा… कुछ ने मेरे पेट पर लात भी मारी।’ शबाना ने आगे बताया कि भीड़ कुछ समय के बाद रुक गई और घर में तोड़फोड़ कर चली गई।

ये कहानी अभी उत्तर पूर्वी दिल्ली के हर कोने की है जहां दंगाई एक तरफ मारने पर तुले हैं वहीं हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का अपना अलग नज़रिया देखने को मिल रहा है। हिन्दू भाई मुस्लिम भाई की जान बचाने के लिए कभी 70 फ़ीसदी तक जल जाता है वहीं मुस्लिम भाई जान बचाने के लिए दंगाइयों तक से लड़ जाता है।

दिल्ली हिंसा के दौरान मंगलवार की दोपहर करावल नगर के महालक्ष्मी विहार इलाके में कुछ दंगाई एक मुस्लिम परिवार के घर में घुस आए। गर्भवती शबाना ने उस भीड़ से निवेदन किया कि वे उसे ना मारें क्योंकि वह गर्भवती है। लेकिन दंगाई नहीं माने और उन पर लाठियां बरसाना शुरू कर दिया। दूसरे दिन जब शबाना को लेबर पेन हुआ, तब उनकी डिलीवरी में मदद के लिए उनके पड़ोसी संजीव आगे आए। उन्होंने वक्त रहते शबाना को अपनी बाइक से अस्पताल छोड़ा, जहां उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया।

शबाना कहती हैं, “सबकुछ खत्म हो चुका है, कुछ नहीं बचा है। हमें फिर से अपनी जिंदगी शुरू करनी पड़ेगी।”

शबाना ने आगे कहा कि हमले के बाद उनके पड़ोसी संजीव ने मंगलवार को उन्हें बाइक से ओल्ड मुस्तफाबाद छोड़ दिया। उनके पीछे-पीछे उनका बाकी परिवार दो बच्चों, सास और अन्य रिश्तेदार भी वहीं आ गए। शबाना की रिश्तेदार शमा ने कहा “हम यहां एक रिश्तेदार के घर पर रुके और शबाना को हमने उनकी माँ के घर नांगलोई में छोड़ने का फैसला किया, ताकि वह अपने बच्चे को वहां जन्म दे सके। एक पुलिस कर्मी हमें यमुना विहार तक छोड़ने को तैयार हो गए। लेकिन तभी शबाना को लेबर पेन होने लगा इसलिए हमने जल्दी से उसे अल-हिंद अस्पताल में पहुंचा दिया।”

शबाना का इलाज करने वाले डॉक्टर ने कहा कि यह एक कॉम्प्लिकेटेड डिलीवरी थी क्योंकि शबाना के पास कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं थी क्योंकि उनके सभी कागजात दंगों में जल गए थे। वह अब बेहतर है, लेकिन वह उदास और परेशान है और जिसके चलते उनके बीपी में उतार-चढ़ाव हो रहा है। शबाना के पति को सूचित कर दिया गया है कि उन्हें एक बच्चा हुआ है। वह यहां आने में असमर्थ है।

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