आयुष्मान की किन फिल्मों ने बदला समाज की तरफ देखने का उनका नज़रिया

विभव देव शुक्ला

आयुष्मान खुराना की फिल्में इन दिनों काफी चर्चा में रहती हैं। चर्चा में रहने के साथ-साथ उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और ऐसे मुद्दों पर होती हैं जो हट कर होते हैं। हाल ही में उनकी फिल्म ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ रिलीज़ हुई है। सोमवार के दिन आयुष्मान ने इस फिल्म और पिछली फिल्मों के बारे में बात की।

फिल्में ने बनाया संवेदनशील
आयुष्मान ने कहा लगातार 8 सफल फिल्में देना खुद में शानदार अनुभव है। लेकिन इसके साथ ही एक और अच्छी बात यह भी है कि इस प्रक्रिया के दौरान मैंने दर्शकों को सार्थक फिल्में भी दी हैं। इस तरह की फिल्में बनाना हमारे पूरे नज़रिये को रचनात्मक बनाता है, ऐसी फिल्में बनाते हुए हमारे सोचने और समझने का दायरा भी बढ़ता है। सबसे बड़ी बात इन फिल्मों ने मुझे ज़्यादा संवेदनशील और बेहतर इंसान बनाया है।

खुले दिमाग से देखी जाएँ फिल्में
इसके बाद आयुष्मान ने बताया कि किस बात से प्रेरणा लेकर वह अलग-अलग फिल्में कर रहे हैं। आयुष्मान ने कहा मैं ‘आर्टिकल 15’ और ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ जैसी प्रायोगिक फिल्में करता रहूँगा। यहाँ तक कि बधाई हो, विकी डोनर और ड्रीम गर्ल भी ऐसी फिल्में हैं जिनकी बदौलत काफी कुछ समझने का मौका मिला।
इन फिल्मों में अपील होती है जिसके हिसाब से समाज ऐसी फिल्में खुले दिमाग से देखे। इस तरह की फिल्मों की सफलता का एक बड़ा कारण है कि यह आज बनाई जा रही हैं और लोगों के द्वारा पसंद भी की जा रही हैं। मेरे लिए इस तरह की फिल्में बहुत अहम है क्योंकि इनमें समाज के लिए संदेश होता है और इनके ज़रिये समाज में अच्छी बहस शुरू होती है।

ऑफ बीट फिल्में करने की इच्छा
मुझे बेहद खुशी है कि शुभ मंगल ज़्यादा सावधान ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया। इससे मेरा भरोसा और मज़बूत होता है कि मुझे ऐसी ऑफ बीट करते रहना है, इसका मतलब है कि भारतीय सिनेमा का एक बड़ा दर्शक वर्ग ऐसी फिल्में देखना चाहता है। बतौर कलाकार मैं ऐसे मुद्दों को सामने लाना चाहूँगा जिन पर समाज में खुल कर चर्चा हो सके। मुझे ऐसा लगता है कि हमारा समाज ऐसी फिल्मों के लिए तैयार है।

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