ओडिशाः पुरी की सड़कों पर अब नहीं दिखेंगे भिखारी

पुरी

जिला प्रशासन ने शुरू की अनोखी मुहिम

ओडिशा के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल एवं पवित्र शहर पुरी में अब धीरे-धीरे आपको भिखारी दिखने कम हो जाएंगे। पुरी को भिखारी मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अभियान शुरू किया है।
जिला प्रशासन ने रविवार को पुरी और इसके आसपास के इलाकों को भिखारी मुक्त बनाने के लिए भिखारियों की पहचान, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए प्रावधान किए हैं।

जिलाधिकारी बलवंत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले के विभिन्न हिस्सों में ‘निलाद्री निलय’ की तर्ज पर आठ भिखारी आश्रय घरों को बनाने का निर्णय लिया गया। प्रत्येक सुविधा में 50 भिखारियों की क्षमता वाले आश्रय घरों का निर्माण किया जाएगा। गैर-सरकारी संगठनों की मदद से समाज कल्याण अधिकारी भिखारियों की पहचान करेंगे। कुष्ठ रोगियों को सड़कों पर भीख मांगते हुए पाए जाने पर उनका इलाज कराया जाएगा जबकि मानसिक रूप से मंद और दिव्यांग लोगों को सड़कों पर भीख मांगने से रोका जाएगा और उन्हें आश्रय घरों में रखा जाएगा। चूंकि यह एक बहुत ही संवेदनशील और कठिन काम है, इसलिए प्रशासन ने इस उद्देश्य के लिए स्थानीय निवासियों, पुलिस और गैर सरकारी संगठनों की मदद लेने का निर्णय लिया है।

पुरी नगरपालिका के चार सामुदायिक आयोजकों को भिखारियों की पहचान करने और उनकी गणना करने के लिए गैर सरकारी संगठनों की मदद से काम करने का भार सौंपा गया है। भिखारियों को भोजन, कपड़े और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। विशेषज्ञ आश्रय घरों में रहने वाले लोगों की काउंसलिंग भी करेंगे।

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