तालिबान का अफगानिस्तान में आंशिक संघर्ष विराम खत्म

काबुल

यूएस-तालिबान के बीच डील पर शनिवार को ही हुए थे हस्ताक्षर

तालिबान ने कहा कि वह आंशिक संघर्ष विराम खत्म करने के साथ ही अफगान सुरक्षा बलों के खिलाफ आक्रामक अभियान फिर शुरू करने जा रहा है। इस आंशिक संघर्ष विराम की घोषणा चरमपंथियों और वॉशिंगटन के बीच समझौते पर दस्तखत होने से पहले की गई थी। हालांकि, जिस तरह से तालिबान ने आंशिक संघर्ष विराम खत्म करने की बात कही है इससे सवाल उठ रहे हैं क्या अफगानिस्तान में शांति समझौते को झटका लग सकता है?

तालिबान ने कहा कि वह सुरक्षा बलों के खिलाफ आक्रामक अभियान फिर शुरू करने जा रहा है, अफगानिस्तान में शांति प्रयासों को लग सकता है झटका

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, ‘हिंसा में कटौती…अब खत्म हो गई है और हमारा अभियान सामान्य रूप से जारी रहेगा।’ उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के मुताबिक, हमारे मुजाहिदीन विदेशी बलों पर हमला नहीं करेंगे लेकिन काबुल के प्रशासन वाले फोर्सेज के खिलाफ हमारा अभियान जारी रहेगा।’ यह घोषणा राष्ट्रपति अशरफ गनी के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह आंशिक संघर्षविराम को कम से कम तब तक जारी रखेंगे जब तक अफगान अधिकारियों और तालिबान के बीच बातचीत, संभवत: 10 मार्च को शुरू नहीं हो जाती।

अफगान फोर्सेज के खिलाफ तालिबान शुरू करेगा अभियान

रक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता फवाद अमन ने कहा कि सरकार ‘देख रही है कि क्या यह (संघर्ष विराम) खत्म हो चुका है।’ उन्होंने कहा, ‘हमें देश में कहीं से अब तक बड़े हमले की जानकारी नहीं मिली है।’ समझौते पर शनिवार को हस्ताक्षर के बाद से ही तालिबान सार्वजनिक रूप से अमेरिका पर अपनी ‘जीत’ का जश्न मना रहा है।

राष्ट्रपति गनी के बयान के बाद तालिबान ने लिया फैसला

समझौते की शर्तों के मुताबिक तालिबान की सुरक्षा गारंटी मिलने और अफगान सरकार से विद्रोहियों की ओर से बातचीत किए जाने के संकल्प पर अमल के बाद विदेशी बल 14 महीनों के अंदर अफगानिस्तान से चले जाएंगे। गनी ने सोमवार को विद्रोहियों को चेताया था कि वह दोहा समझौते के उस महत्वपूर्व बिंदु को लेकर प्रतिबद्ध नहीं हैं जिसके तहत हजारों तालिबान कैदियों की रिहाई की बात कही गई है।

हाथों में बैनर और चेहरे पर तालिबान का खौफ

काबुल। अमेरिका ने तालिबान से समझौता कर अफगानिस्तान को बीच मझधार में अकेला छोड़ दिया है, जहां तालिबान और अफगान सरकार के बीच कोई दीवार नहीं रह गई है। लिहाजा तालिबान के सीधे हमले को अब अफगान सरकार को ही झेलना होगा, इसमें अमेरिका का कोई दखल नहीं होगा। तालिबान ने साफ कर दिया है कि समझौता अमेरिका से हुआ है इसलिए केवल उसपर हमला नहीं किया जाएगा, लेकिन अफगान सरकार के ठिकानों पर हमले पहले की तरह जारी रहेंगे। गौरतलब है कि इस समझौते को लेकर पहले से ही अफगानी महिलाएं काफी सहमी हुई हैं। सोमवार को अफगान सिविल सोसाइटी के बैनर तले अफगानी महिलाओं ने एक प्रदर्शन भी किया था। इन महिलाओं ने हाथों में बैनर लिया हुआ था, जिसपर तालिबान के शासन में महिलाओं पर हुए जुल्म। को दर्शाया गया था। इन महिलाओं का कहना था कि वह उन दिनों को नहीं भूल सकती हैं। ये समझौता अमेरिका की वापसी के लिए तो ठीक है, लेकिन जिस भविष्य की उम्मीद जताकर ये किया गया है उस पर शुरुआत से ही पानी फिरता नजर आ रहा है।

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