तालिबानियों ने बीस अफगान सैनिकों को मौत के घाट उतारा

काबुल

अफगानिस्तान फिर से गृहयुद्ध की ओर बढ़ा, राष्ट्रपति ट्रंप के फोन का भी कोई असर नहीं

आतंकवादी संगठन तालिबान के साथ अमेरिका का शांति समझौता खटाई में पड़ गया है। अफगानिस्तान एक बार फिर से भीषण गृहयुद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 35 मिनट तक फोन करने के बाद भी तालिबान ने बुधवार को 20 अफगान सैनिकों को मार डाला। तालिबान की इस कार्रवाई के बाद अब अमेरिका ने भी जोरदार हवाई हमला किया है। इससे अफगानिस्तान में 18 साल तक चली जंग के बाद शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के बाद तालिबान लड़ाकुओं ने उत्तरी अफगानिस्तान में अफगान सेना और पुलिसकर्मियों पर भीषण हमला किया और 20 जवानों को मार डाला। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत में तालिबान ने अफगान नेशनल आर्मी के सैनिकों पर हमला किया। इस हमले में 20 सैनिकों और 3 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। अफगान सूत्रों के मुताबिक तालिबान ने 10 सैनिकों को बंधक भी बना लिया है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी ने बताया कि तालिबान ने अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से 16 में पिछले 24 घंटे में 33 हमले किए। बता दें कि राष्‍ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को तालिबान के राजनीतिक प्रमुख मुल्ला बरादर से फोन पर बात की। यह वही मुल्ला बरादर है जिसे अफगानिस्तान में हजारों अमेरिकी सैनिकों की शहादत के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

अमेरिकी वायुसेना ने बरसाए बम

इस हमले के बाद अमेरिकी वायुसेना ने भी तालिबान के ठिकानों पर बम बरसाए हैं। अमेरिकी वायुसेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि तालिबान हमलावर हेलमंद प्रांत के नस्र-ए-सराज इलाके में अफगान सेना पर हमले कर रहे थे। यह हमला आत्मरक्षा में किया गया है ताकि हमलों को रोका जा सके। पिछले 11 दिनों में अमेरिका की ओर से यह पहला हमला है। बताया जा रहा है कि इस जवाबी हमले में कई तालिबानी मारे गए हैं।

यूएस ने कहा- हमला बंद करे तालिबान

अमेरिकी वायुसेना ने कहा, ‘तालिबान नेताओं ने अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से वादा किया था कि वे हिंसा को कम करेंगे और हमले नहीं बढ़ाएंगे। हम तालिबान से आह्वान करते हैं कि वे हमले बंद करें और अपने वादों को पूरा करें। जैसा कि हमने पहले किया है, हम जरूरत पड़ने पर अपने पार्टनर्स की मदद करेंगे। हम स्‍पष्‍ट करते हैं कि हम शांति को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हालांकि हमारे ऊपर अफगान सेना की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी है।’ यूएस एयरफोर्स ने कहा, ‘अमेरिका के साथ डील के बाद इसका फायदा उठाते हुए तालिबान अफगान सरकार को हटाना चाहते हैं और लोगों की शांति की इच्‍छा को अनदेखा कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले 6 दिनों में अमेरिकी हवाई हमले में कुनार प्रांत में 18 आईएसआईएस आतंकी मारे गए हैं।

शांति समझौते पर मंडराया संकट

दोनों पक्षों के हमलों के बाद अब अफगानिस्तान में शांति डील खटाई में पड़ती दिख रही है। अमेरिका और तालिबान के बीच सीमित युद्धविराम संधि के समाप्त होने के कुछ घंटों बाद ही ये हमले किए गए हैं। अमेरिका और तालिबान के बीच शनिवार को हुए शांति समझौते के अनुसार अंतर-अफगानिस्तान वार्ता 10 मार्च को होनी है, लेकिन कैदियों की अदला-बदली ने इसके होने ना होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका-तालिबान के बीच हुए समझौते में अफगान सरकार द्वारा पांच हजार तालिबान कैदियों की रिहाई की बात थी। तालिबान 1000 कैदियों को रिहा करेगा। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि कैदियों की रिहाई के लिए अमेरिका ने कहा था और यह वार्ता का हिस्सा हो सकता है।

ये हमले सफलता के लिए : विश्लेषक

काबुल के एक विश्लेषक अहमद सईदी ने कहा कि हमलों से स्पष्ट है कि तालिबान का मानना है कि वार्ता में सफलता पाने के लिए हमले जारी रखना जरूरी है, जैसा कि उन्होंने अमेरिका के साथ किया था। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान मिशन ने ‘अंतर-अफगानिस्तान वार्ता की शुरुआत के लिए अनुकूल वातावरण को बनाए रखने के लिए हिंसा को कम करने’ की अपील की। गौरतलब है कि अमेरिका और तालिबान के ऐतिहासिक समझौते पर हुए हस्ताक्षर के तहत अमेरिका अगले 14 महीनों में अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी पूरी कर लेगा और शुरुआती चरण में अगले चार महीनों के अंदर सैनिकों की संख्या वहां 13,000 से घटाकर 8,600 कर दी जाएगी। समझौते के तहत पहले 135 दिनों में अमेरिका अफगानिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या घटाकर 8,600 करेगा।

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