यस बैंक पर आरबीआई ने लगाई रोक, एक बार फिर एटीएम के बाहर लंबी कतार

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। भारतीय बैंकिंग का एक और ख़राब दिन लोगों को देखने को मिल रहा है। यस बैंक में जितने लोगों के पैसे जमा थे उनके लिए बुरी ख़बर है। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को नकदी संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के यस बैंक पर रोक लगा दिया है।

इसके अलावा बैंक के जमाकर्ताओं के लिए 50,000 रुपये की निकासी की सीमा तय की गयी है। बैंक के लिए एक प्रशासक की भी नियुक्ति की गई है। यस बैंक पर 30 दिन की अस्थायी रोक लगा दिया गया है।

इस पूरी अवधि में खाताधारक 50 हजार रुपये से अधिक नहीं निकाल सकेंगे। यदि किसी खाताधारक के इस बैंक में एक से अधिक खाते हैं तब भी वह कुल मिलाकर 50 हजार रुपये ही निकाल सकेगा। आरबीआई की अधिसूचना में कहा गया है कि आज शाम छह बजे से यह रोक शुरू हो गयी है और 03 अप्रैल तक जारी रहेगी।

आरबीआई ने, यस बैंक को ‘मोराटोरियम’ की कैटगरी में रख दिया है। ‘मोराटोरियम’ माने यस बैंक की बैंकिंग गतिविधियों पर आंशिक रूप से रोक लगा दी गई है। रोक लगाने को लेकर आरबीआई का कहना है कि, “यस बैंक की वित्तीय स्थिति में लगातार गिरावट आई है। इसका कारण ये रहा कि संभावित ऋण घाटे से उबरने के लिए यस बैंक पूंजी जुटाने में असमर्थ रहा। बैंक के साथ गंभीर गवर्नेंस इश्यूज़ हैं। यस बैंक अपने को रिस्ट्रक्चर कर पाए, इसके लिए RBI ने उसे हरसंभव सहयता दी। साथ ही उसे मौके दिए कि वो कुछ पैसे बैंक के लिए इकट्ठा कर पाए। लेकिन इन सब से कोई फायदा होता नहीं दिखा।”

आरबीआई ने आगे कहा, “बैंक के बोर्ड को 30 दिनों की अवधि के लिए अधिगृहीत किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व सीएफओ (मुख्य वित्त अधिकारी) प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। अगले आदेश तक बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय की गई है। जमा पर निकासी प्रतिबंध कुछ शर्तों के अधीन होगा। केन्द्रीय बैंक सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, बैंक को निम्नलिखित अप्रत्याशित परिस्थितियों में 50,000 रुपये से अधिक की निकासी की अनुमति दे सकता है।”

यस बैंक ने जो कर्ज बांटा था उसमें अधिकांश डूब गए हैं, बैंक इस समस्या से जूझ रहा है। बैंक चाहता है कि नई पूंजी जुटाई जाए लेकिन इस काम में उसे दिक्कत आ रही है। इसी वजह से बैंक ने दिसंबर, 2019 की तिमाही नतीजे भी घोषित नहीं किए हैं। एनपीए की वजह से बैंक की सुरक्षित पूंजी कम हो गई है।

करीब 6 महीने पहले ही आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर ऐसा ही प्रतिबंध लगाया था। पीएमसी बैंक पर वित्तीय संकट को देखते हुए आरबीआई ने अधिकतम 10 हजार रुपये की विड्रॉल लिमिट तय किया था। हालांकि, बाद में आरबआई ने इस लिमिट को बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया था।

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