ज्योतिरादित्य ने इस्तीफा दिया वहीं एमपी कांग्रेस ने एहसान गिना दिए

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। होली के दिन जहाँ पुरे भारत में होली मिलन की धूम मची थी वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया होली के दिन अपनी पार्टी से अलग हो गए। सिंधिया का जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। कांग्रेस ने अब ज्योतिरादित्य सिंधिया पर विश्वासघात का आरोप लगाया है।

सिंधिया के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की खबरों के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार सुबह एक ट्वीट किया है जिसमें विश्वासघात की तस्वीर के साथ कांग्रेस द्वारा ज्योतिरादित्य सिंधिया पर किए गए अहसानों की पूरी लिस्ट के साथ कल एक वीडियो भी पोस्ट किया था।

लिस्ट में ज्योतिरादित्य सिंधिया को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ट्वीट कर लिखा कि सिंधिया जी की 18 साल की राजनीति में कांग्रेस ने उन्हें 17 साल सांसद बनाया, 2 बार केंद्रीय मंत्री बनाया, मुख्य सचेतक बनाया, राष्ट्रीय महासचिव बनाया, यूपी का प्रभारी बनाया, कार्यसमिति सदस्य बनाया, चुनाव अभियान प्रमुख बनाया, 50 से ज्यादा टिकट, 9 मंत्री दिये, फिर भी मोदी-शाह की शरण में?

वहीं कांग्रेस ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है कि गर्दन कटी भी नहीं, पर झुक गये। कल तक जिस मोदी और बीजेपी की तानाशाही को ललकारते रहे, आज वहीं नतमस्तक होने को बेक़रार हैं।
उसूलों के लिये नहीं,
लाभ के लिये टकरा गये,
ज़िंदा दिखने की आड़ में,
क़ातिलों के पास आ गये।

कांग्रेस ने जो वीडियो पोस्ट किया उसमें वे कह वो रहे हैं, “एक न्यू इंडिया, जहां बेरोजगारी की जब बात की जाती है, तो कहा जाता है कि दो करोड़ रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। लेकिन आज जब नौजवान भटक रहा है रोजगार के लिए, तो उसे पकौड़ा तलने की नसीहत दी जाती है। ये है मोदी जी का न्यू इंडिया। जहां संसद में, जिसे लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है। लेकिन संसद के बहुमत को हिटलरशाही और तानाशाही का लाइसेंस लगाकर आवाज दबाने की कोशिश की जाती है। मैं मोदी जी और उनकी सरकार को कहना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी का एक-एक सांसद और कार्यकर्ता कभी झुका नहीं है। हमारी गर्दन कट जाए, लेकिन हम झुकेंगे नहीं। यह एक संदेश इस अधिवेशन से भेजना चाहते हैं।”

सिंधिया 2018 में एमपी विधानसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस आलाकमान से नाराज चल रहे थे। वे पहले एमपी के सीएम बनने की रेस में थे। बाद में वे एमपी कांग्रेस अध्यक्ष की दावेदारी जता रहे थे। लेकिन उन्हें दोनों ही पद नहीं मिले। इसके बाद से उनकी नाराजगी गहरा गई थी। चार महीने पहले उन्होंने ट्विटर पर अपना बायो बदल लिया था। उन्होंने इसमें पूर्व मंत्री और सांसद के बजाय केवल जनसेवक और क्रिकेट प्रेमी लिख लिया था। 10 मार्च को आखिर सिंधिया ने कांग्रेस से अलग रास्ता अपना लिया। दिलचस्प बात यह भी रही कि 10 मार्च को उनके पिता माधवराव सिंधिया की जयंती भी होती है।

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