‘महाराज’ के साथ के लिए हाथों-हाथ छोड़ दी पार्टी , 300 इस्तीफे

नगर संवाददाता | इंदौर

शहर कांग्रेस अध्यक्ष टंडन, पूर्व विधायक पटेल, खुजनेरी सहित कई ने कांग्रेस छोड़ी

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे का असर इंदौर में भी तगड़ा हुआ। यहां भी सिंधिया समर्थकों ने सिंधिया के प्रति निष्ठा दिखाते हुए कांग्रेस को त्याग दिया। बीते 13 साल से प्रदेश कांग्रेस के पद पर काबिज प्रमोद टंडन ने मंगलवार को ही पार्टी हाइकमान को इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद दूसरे सिंधिया समर्थकों ने अपने इस्तीफे देना शुरू किए। बुधवार को जब सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा तो उसका गुस्सा गांधीभवन में साफ नजर आया। गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिंधिया और प्रमोद की तस्वीरों को उखाड़ा और फिर उन्हें स्टोर रूम में फेंक दिया। गुस्सा यहीं नहीं थमा कई कार्यकर्ताओं ने सिंधिया को पार्टी से गद्दारी करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी किया। इंदौर में 300 से ज्यादा सिंधिया समर्थकों ने पार्टी छोड़ी है जबकि कांग्रेस के कार्यकारी शहर अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने बताया कि शहर से टंडन सहित करीब 35 लोगों ने पार्टी से इस्तीफा दिया है।

सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद सबसे अधिक प्रभाव सांवेर विधानसभा क्षेत्र, देपालपुर विधानसभा और क्षेत्र क्रमांक पांच में पड़ेगा। इन तीनों जगहों से सबसे अधिक कांग्रेसियों ने पार्टी छोड़ी है। इनमें मुख्य रूप से पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन और मोहन सेंगर प्रमुख नाम हैं। इसके अलावा मंजूर बेग, अजय सेंगर, दीपक राजपूत, संदीप मेहता, नासिर खान, योगेश गेंदर, राजू चौहान, प्रकाश तिवारी, डब्बू यादव, श्याम सिलावट, पवन जायसवाल, विपिन खुजनेरी, मनीषा शिरोड़कर और मुकेश शर्मा सहित अन्य कई नाम भी शामिल हैं। हालांकि विनय वाकलीवाल का कहना कि मैंने नहीं देखा कि कितने लोगों ने इस्तीफा भेजा है। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक 30 से 35 इस्तीफे हुए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार पूरे पांच साल चलेगी। इधर सिंधिया खेमे से नाराज कार्यकर्ताओं ने अनूप शुक्ला के नेतृत्व में बुधवार को प्रदर्शन कर उनके पोस्टर जलाए। गुरुवार को भोपाल आ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में इंदौर से बड़ी संख्या में सिंधिया समर्थक कार्यकर्ता भोपाल पहुंचेंगे। वे भोपाल में तुलसी सिलावट के बंगले पर इकट्‌ठा होंगे।

टंडन ने कहा-जहां महाराज, वहां मैं

शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने कहा मैंने कांग्रेस के प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया है। मेरे साथ दर्जनों मेरे समर्थकों ने कांग्रेस छोड़ी है। तुलसी सिलावट के कट्‌टर समर्थक अजय सेंगर ने कहा सिंधिया के साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस की सरकार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शहर कांग्रेस प्रवक्ता रहे मंजूर बेग ने कहा कांग्रेस आलाकमान द्वारा उनकी उपेक्षा की जा रही थी। मैं सिंधिया, तुलसी सिलावट के साथ रहूंगा। युवक कांग्रेस के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष पवन जायसवाल ने कहा 16 माह में कभी लगा ही नहीं कि प्रदेश में मेरी सरकार है। इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। मैंने भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इधर, पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल गुरुवार को समर्थकों से चर्चा करेंगे।

सिलावट, सांवेर व सोनकर परिवार की सियासत

इंदौर। तुलसी सिलावट। सिंधिया के सबसे ज्यादा वफादार। या यूं कहें पार्टी से भी ज्यादा सिंधिया परिवार को तवज्जो देने वाले राजनेता। हालांकि सिलावट अकेले नहीं हैं। 22 विधायकों ने भी यही साबित किया है। हो सकता है आने वाले दिनों में और विधायक या बड़े नेता पार्टी के बजाय सिंधिया का साथ देकर अपनी निष्ठा जाहिर करें। सिंधिया के फॉलोअर्स का साथ भाजपा को बड़ा रास आ सकता है, लेकिन उनके फॉलोअर्स के इलाके में बीता चुनाव हारे भाजपा नेताओं में खलबली मची है। उन्हें अभी सूझ नहीं पड़ रही है कि आखिर उनका आगे क्या होगा?

तुलसी सिलावट के बहाने सांवेर और सोनकर परिवार की सियासत में आने वाले पेंच को अच्छे से समझा जा सकता है। सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद उनके समर्थक विधायकों को जिस तरह एडजस्ट करने की बातें चल रही हैं उसे सही मानें तो आने वाले दिनों में भाजपा का अंतर्कलह बढ़ भी सकता है। आज की चर्चा कल सच साबित होती है तो आने वाले समय मे सिलावट अपने इस्तीफे से रिक्त होने वाली सांवेर सीट से कांग्रेस के बजाय भाजपा के उम्मीदवार होंगे। सांवेर सिलावट का पुराना कार्यक्षेत्र है। चार बार यहीं से विधायक निर्वाचित हुए हैं लेकिन उनका स्थायी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सोनकर परिवार सिलावट की पांचवी बार की विधायकी के लिए मन से आसानी से तैयार होंगे कहना मुश्किल है। इंदौर की राजनीति में दूसरे सिंधिया समर्थकों से मौजूदा भाजपा नेताओं को भले ज्यादा परेशानी न हो लेकिन शिवराजसिंह चौहान को अपने चहेते राजेश सोनकर को ओर कहीं एडजस्ट करना सरल नहीं होगा।

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