रिहा होने के बाद फ़ारुख अब्दुल्लाह का पहला बयान ‘मैं भले आज़ाद हूँ पर ये आज़ादी अधूरी है’

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। मैं आज आजाद हुआ हूं, लेकिन ये आजादी तब तक अधूरी है, जब तक कि हिरासत में लिए अन्य सभी लोगों को रिहा ना कर दिया जाए। रिहा होने के बाद फारुख अब्दुल्लाह का ये पहला बयान है।

फ़ारुख अब्दुल्ला श्रीनगर के सांसद हैं और उन्हें अनुच्छेद 370 के अंत के बाद से ही श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित उनके आवास पर नज़रबंद रखा गया था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने सात महीने तक नज़रबंद रखे जाने के बाद राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला को शुक्रवार शाम रिहा कर दिया गया।

रिहा होने के बाद फारुख की एक तस्वीर भी सामने आई है जिसमें वह अपने परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कहा है कि वो जल्द ही दिल्ली संसद की कार्रवाई में हिस्सा लेंगे। 82 वर्षीय फारुक अब्दुल्ला के साथ दो और पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को भी अलग-अलग जगहों पर हिरासत में रखा गया था।

फारूक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ” उन सभी के लिए आभारी हूं जिन्होंने मेरी आजादी के लिए आवाज़ उठाई, लेकिन यह आज़ादी तब तक अधूरी है जब तक कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा नहीं किया जाता। मैं तब तक अपनी राजनीतिक टिप्पणियां नहीं करूंगा जब तक मेरे साथी रिहा नहीं हो जाते।”

अभी उमर और महबूबा की रिहाई के आदेश नहीं हुए हैं। केंद्र सरकार के गृहराज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में फिलहाल 400 से अधिक लोग हिरासत में हैं। इनमें से कई लोगों को स्थितियों की समीक्षा के बाद रिहा किया जाएगा। ये अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार फारुक अब्दुल्ला की रिहाई से घाटी पर पड़ने वाले असर को देखना चाहती है। इसके बाद ही वह बाकी दो बड़े नेताओं की रिहाई पर कोई फैसला लेगी।

सरकार की ओर से फारूक पर 15 सितंबर को पीएसए लगाया गया था, और इसके बाद इसे 13 दिसंबर तो तीन महीने के लिए फिर बढ़ा दिया गया था। 13 मार्च को जो पीसीए लगाया गया था वो खत्म हो गई। जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया।

वहीं 9 मार्च को आठ विपक्षी पार्टियों ने केंद्र से मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को तत्काल रिहा किया जाए। विपक्षी नेताओं ने कहा कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं कि इन लोगों की गतिविधियों ने राष्ट्रीय हितों को खतरे में डाला हो।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी, जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, राजद नेता मनोज झा, पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने बयान जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को रिहा करने की मांग की थी।

Next Post

कैसे नदी में तैराकी सीख कर दिव्यांग तैराक ने तय किया अमेरिका का सफर?

Fri Mar 13 , 2020
विभव देव शुक्ला देश में ऐसे तमाम लोग हैं जो अच्छा भला संघर्ष करने के बावजूद खुद को साबित करते हैं। उनके सामने हालात भले कितने भी मुश्किल क्यों न हों लेकिन फिर भी वह समाज के सामने मिसाल कायम करने से नहीं चूकते हैं। हमारे देश की खेल दुनिया […]