जिस बयान के चलते वरुण गांधी को राजनीति में मिली फायरब्रांड हिन्दू नेता की छवि

विभव देव शुक्ला

भारतीय जनता पार्टी में ऐसे तमाम नेता हैं जिनकी पहचान उनके बयानों से होती है। वह जिस तरह के बयान देते हैं उनके चलते राजनीति और समाज में उनकी छवि तैयार होती है। भाजपा का एक युवा चेहरा ऐसा है जिसकी शुरुआती पहचान एक फायरब्रांड हिन्दू नेता के रूप में बनी।
लेकिन कुछ ही समय बाद इस छवि में बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ। भले अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत में वरुण गांधी ने तमाम विवादित बयान दिए हों पर बीते कुछ सालों से उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जो सुर्खियों की वजह बने।

जनता के लिए कुछ नया
साल 2009 का आम चुनाव, देश के दो सबसे बड़े दलों के बीच खींचतान का एक अहम दौर। इस चुनावी खींचतान का सबसे ज़्यादा असर था सीटों के लिहाज़ से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश पर। राज्य के कुछ संसदीय क्षेत्र ऐसे थे जो प्रत्याशियों की वजह से खास और दलों के लिए अहम थे, ऐसा ही एक संसदीय क्षेत्र था पीलीभीत। 2009 के पहले तक यहाँ से वरुण गांधी की माँ मेनका गांधी ने चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार जनता के लिए कुछ नया था।

धर्म विशेष के खिलाफ नफ़रत
पीलीभीत संसदीय क्षेत्र से वरुण गांधी चुनाव लड़ने वाले थे। चुनाव अहम था लिहाज़ा प्रचार और जनसभाओं का दौर शुरू हुआ, वरुण गांधी ने क्षेत्र में खूब सभाएं की। चुनाव में उनके सामने थे पूर्व विधायक और रिश्ते में उनके मामा वीएम सिंह, यह एक बड़ा कारण था जिसके चलते वरुण के लिए चुनाव कठिन साबित हो रहे थे। इसी बीच एक जनसभा में भाषण देते हुए वरुण गांधी ने एक विवादित बयान दिया। जिसके बाद उन पर दो धर्मों के बीच नफ़रत फैलाने और धर्म विशेष का अपमान करने का आरोप लगा।

आत्म समर्पण के दौरान चले पत्थर
इसके बाद पुलिस ने वरुण गांधी पर मुकदमा दर्ज किया था। मामला इतना गम्भीरता से लिया गया कि वरुण गांधी पर रासुका की नौबत आ गई लेकिन घटना के बाद पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगा था। अंत में नतीजा यह निकला कि क्षेत्र के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी कार्यवाई की मार झेलनी पड़ी थी।
उस दौरान राज्य की कमान मायावती के हाथों में थी और उन्होंने इस पूरी घटना की खूब आलोचना की थी। राज्य में इतना बवाल होने के बाद वरुण गांधी 28 मार्च 2009 को पूरे दल-बल के साथ आत्मसमर्पण करने थाने पहुँचे।
ख़बरों में चर्चा यहाँ तक था कि वह नज़ारा आत्मसमर्पण का कम और शक्ति प्रदर्शन का ज़्यादा था। माहौल कुछ इस कदर गर्म हुआ कि वरुण गांधी के समर्थकों ने मौके पर पत्थर भी चलाए थे लेकिन अंत में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

ऐसे नेताओं से जूते खुलवाता हूँ
इस तरह की दूसरी घटना कम ही लोगों की जानकारी में है लेकिन साल 2019 में वरुण गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान एक बार फिर विवादित बयान दिया था। अपनी माँ मेनका गांधी के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए वरुण गांधी उनके संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर पहुँचे थे।
चुनाव में उनकी माँ के सामने सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी चन्द्रभद्र सिंह उर्फ सोनू थे जिनकी उस क्षेत्र में अच्छे भले दबंग की छवि थी। सारी बातों को किनारे रखते हुए वरुण गांधी ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा ‘एक इंसान जिसमें स्वाभिमान न हो वह ज़िंदा लाश की तरह है।
आप लोगों को डरने की ज़रूरत नहीं है, डरने की ज़रूरत ऐसे लोगों को जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी में पाप और गुनाह किए हैं। आप लोगों को किसी टोनू – मोनू से डरने की ज़रूरत नहीं है, मैं आपके लिए यहीं खड़ा हूँ। मैं संजय गांधी का लड़का हूँ, इस तरह के लोगों से अपने जूते खुलवाता हूँ।’

क्या होगी भूमिका
उत्तर प्रदेश की राजनीति किसी भी चुनाव के लिहाज़ से अहम मानी जाती है। राज्य में ऐसे तमाम चेहरे हैं जिनके इर्द-गिर्द पूरे राज्य की राजनीति घूमती है लेकिन प्रदेश की राजनीति में वरुण गांधी की भूमिका क्या होगी यह समय ही बताएगा। प्रदेश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वरुण गांधी को पसंद उनके बयानों के चलते ही करता है।
वहीं दूसरी तरफ तमाम जानकार उनकी राजनीति में उनकी सधी हुई भूमिका की वजह उनके बयानों को मानते हैं। हर बड़ी बात और बड़े कामों के कुछ नतीजे होते हैं, वैसे ही वरुण गांधी के बयानों का भी कुछ परिणाम निकला, छवि से इतर राजनीति में वरुण गांधी का आने वाला कल कैसा होगा यह समय ही बताएगा।

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