कोरोना का सामना कर लेंगे पर कोरोना से हुई मौतों की लाशों का क्या होगा?

विभव देव शुक्ला

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि कोरोना वायरस हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। चीन से शुरू इस बीमारी का दायरा इतना ज़्यादा फैल चुका है कि अब दुनिया के तमाम देश इस बीमारी की जद में आ चुके हैं। गुज़रे कुछ दिनों से हमारे देश में भी इस बीमारी का असर काफी बढ़ चुका है। फिर भी इस बीमारी के असर का एक पहलू ऐसा है जिसका ज़िक्र कम ही मिल रहा है। वह पहलू है इस बीमारी से होने वाली मौतों के बाद लाशों का क्या होगा?

2 लोगों की हो चुकी है मौत
कोरोना के चलते 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है। बीते शुक्रवार को दिल्ली के जनकपुरी इलाके में रहने वाली 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की कोरोना वायरस की वजह से मौत हो गई थी। मौत होने के लगभग 14 घंटे बाद तक उनका शव पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल और उसके बाद निगमबोध घाट परिसर में रखा हुआ था। यानी महिला की मौत शुक्रवार के दिन हुई थी पर उनका अंतिम संस्कार शनिवार के दिन हुआ।
जबकि अस्पताल से जुड़े लोगों ने कहा था कि शव का अंतिम संस्कार जल्द से जल्द होना चाहिए इसके बावजूद अंतिम संस्कार में इतना ज़्यादा समय लग गया। हालांकि अभी सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी लापरवाही आखिर हुई कैसे? दरअसल स्वास्थ्य अधिकारी, अस्पताल के कर्मचारी, नगरपालिका और शमशान घाट पर मौजूद लोग, इनमें से कोई भी कोरोना वायरस से प्रभावित शरीर को संभालने के लिए तैयार नहीं था।

कैसे हुई यह घटना

इसका सबसे स्वाभाविक कारण था वायरस की वजह से लोगों में फैला डर। एक समाचार समूह से बात करते हुए दिल्ली सरकार के अधिकारी ने इस बारे में कई जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है जिसमें कोरोना से प्रभावित शवों को संभालने से जुड़ा तरीक़ा बताया गया हो। इसके बाद अधिकारी ने बताया स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक के मुताबिक कोरोना वायरस से प्रभावित शवों को वैसे ही संभालना है जैसे इसके मरीजों का इलाज होता है।

शुरूआत से ही लग रहा था समय
मरने वाली महिला के परिवार की एक महिला ने बताया कि उनकी मौत रात में ही हो गई थी। इसके बाद अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि वह शव को अस्पताल के भीतर नहीं रख सकते हैं। लगभग 1 बजे रात के आस-पास शव को निकाल कर एंबुलेंस से भेजा गया था। चिकित्सकों ने हमसे कहा था कि शव का जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक शवदाह या शमशान की सुविधाओं से अंतिम संस्कार कर दिया जाए। क्योंकि कोरोना वायरस मौत के कुछ समय बाद तक सक्रिय रहता है।

मंत्रालय जारी करेगा निर्देश
अंतिम संस्कार पर इतना विवाद होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय ने कहा हम कोरोना वायरस से प्रभावित शवों के अंतिम सरकार के लिए दिशा निर्देश तैयार कर रहे हैं। वहीं एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मरने वालों के अंतिम संस्कार से कोरोना वायरस की बढ़ोतरी पर कोई असर नहीं पड़ता है। ऐसे में हमारे लिए यह भी ज़रूरी हो जाता है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस बात को लेकर जागरूक हों। हम इसकी जागरूकता के लिए भी काम कर रहे हैं कि शवों के अंतिम संस्कार से कोरोना नहीं बढ़ता है।

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