स्कूल, कालेज भले बंद हो जाये पर शाहजहाँ का उर्स नहीं होगा रद्द

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। हम भारतीय हैं हमारे लिए स्वास्थ्य से ज़्यादा धर्म और रीति-रिवाज़ मायने रखता है। जहाँ कोरोना वायरस के कारण सरकारी बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द हो गए हैं यहाँ तक कि स्कूल, कालेजों तक की छुट्टी कर दी गई है। वहीं उर्स कमेटी ने तीनों दिन के कार्यक्रम रद्द करने से इनकार किया है।

ताजमहल में 21 से 23 मार्च तक होने वाले शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स पर कोरोना वायरस के खौफ का असर नहीं पड़ेगा। बेशक होली मिलन समारोह, सरकारी बैठकें, सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द हो गए और स्कूल, कालेजों की छुट्टी कर दी गई, लेकिन शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स को कमेटी एहतियात बरतकर मनाने के लिए तैयार है। उर्स कमेटी ने तीनों दिन के कार्यक्रम रद्द करने से इनकार किया है।

शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स पर कोरोना वायरस के कहर को मद्देनज़र रखते हुए उर्स कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि उर्स जरूर होगा। ताजमहल के अंदर जो भी लोग प्रवेश करेंगे, उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी, उसके बाद प्रवेश दिया जाएगा। एहतियात बरतने के बाद ही हर किसी को प्रवेश मिलेगा। केवल उर्स ही नहीं, बल्कि शुक्रवार को नमाज में भी थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही नमाजियों को प्रवेश दिया गया।

हालांकि, एएसआई ने इस बारे में सरकारी आदेश के इंतजार की बात कही है। ताजमहल में शाहजहां के उर्स का तीन दिवसीय कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। एएसआई और स्थानीय उर्स कमिटी मिल कर सारी व्यवस्थाएं करते हैं।

आमतौर पर किसी सूफी संत की पुण्यतिथि पर उसकी दरगाह पर वार्षिक रूप से आयोजित किये जाने वाले उत्सव को उर्स कहते हैं। दक्षिण एशियाई सूफी संत मुख्य रूप से चिश्तिया कहे जाते हैं और उन्हें अल्लाह का प्रेमी समझा जाता है।

उर्स की रस्मों को आम तौरपर दरगाह के संरक्षक या उस सिलसिला के मौजूदा शेख द्वारा निभाया जाता है। उर्स के उत्सव में हम्द, नाट तथा कव्वाली संगीतों का गायन भी शामिल होता है। अक्सर उर्स के समय दरगाह के आसपास में भोजन, बाज़ार और विभिन्न प्रकार के मेले भी आयोजित करवाये जाते हैं।

इस दौरान ताज में पर्यटकों का प्रवेश निःशुल्क रहेगा। साथ ही तहखाना में स्थित शाहजहां व मुमताज की असली कब्रों को भी देख सकेंगे। उर्स का मुख्य आकर्षण सर्वधर्म सद्भाव की प्रतीक सतरंगी चादर रहेगी।

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