पत्नी का साफ-सफाई से नहीं रहना तलाक का आधार नहीं

मांगीलाल चौहान | इंदौर

फेमिली कोर्ट का आदेश, तलाक का केस खारिज

एक युवक इस आधार पर फेमिली कोर्ट में तलाक लेने पहुंच गया कि उसकी पत्नी ने वादे के मुताबिक नौकरी नहीं छोड़ी और साफ सफाई से नहीं रहती। कोर्ट ने इस आधार पर तलाक का प्रकरण खारिज कर दिया कि नौकरी नहीं छोड़ना और साफ सफाई से नहीं रहना तलाक का आधार नहीं हो सकता। फेमिली कोर्ट में प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा ने अहम आदेश जारी कर प्रकरण तलाक योग्य नहीं माना।

मामला इंदौर के युवक मृदुल (परिवर्तित नाम) व पन्ना निवासी रवीना (परिवर्तित नाम) का है। दोनों का विवाह 29 मई 2010 को पन्ना में हुआ था। युवक ने इस आधार पर फेमिली कोर्ट इंदौर में तलाक का प्रकरण पेश किया था कि विवाह के पूर्व युवक के परिजन ने लड़की वालों को स्पष्ट बता दिया था कि वह उस युवती से विवाह करेगा जो नौकरी नहीं करती हो और घरेलू कार्य में दक्ष हो। लड़की वालों ने तब कहा था कि लड़की घरेलू कार्य में निपुण है और वर्तमान में नौकरी करती है किंतु विवाह के बाद वह नौकरी छोड़ देगी। विवाह होने के बाद युवक ने पत्नी से नौकरी छोड़ने को कहा किंतु उसने नौकरी नहीं छोड़ी। युवती पन्ना में नौकरी करती थी और युवक ने उसे यह भी कहा कि वह इंदौर या आसपास तबादला करवा ले किंतु वह भी नहीं किया। तलाक प्रकरण में युवक ने यह भी कहा कि उसकी पत्नी को साफ सफाई से रहने की आदत नहीं है और वह घरेलू कार्य भी नहीं कर पाती। जब उसे घरेलू कार्य करने को कहा जाता तो वह गुस्सा होकर झगड़ने पर उतारू हो जाती। तलाकनामे में युवक ने यह भी कहा कि वह एवेस्क्युलर नेसक्रोसिस आफ फ्युमरहेड नामक बीमारी से ग्रस्त होकर बैठ नहीं पाता, इसके बावजूद युवती उसे सहयोग नहीं करती। युवक ने यह भी कहा कि उसे उसकी अस्वस्थ माता की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ना पड़ी। युवक ने यह भी कहा कि उसे उसकी पत्नी 12 जून 2015 को अपनी बच्ची को लेकर यह कहते हुए मायके चली गई कि वह नौकरी नहीं छोड़ेगी और लंबे समय तक मायके में रहेगी। ज्यादा दबाव बनाया तो खुदकुशी का प्रयास दिखा कर झूठे प्रकरणों में फंसा देगी।

कोर्ट ने कहा- ये आधार नहीं हो सकते

जज सुरभि मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह प्रमाणित नहीं हो पाया कि युवती ने विवाह के पहले नौकरी छोड़ने का वादा किया था। ये तथ्य भी प्रमाणित नहीं हो सके कि युवती साफ सफाई से नहीं रहती, घरेलू कार्य नहीं करती और गुस्सैल होकर झगड़ा करती है। यह भी प्रमाणित नहीं हो सका कि विवाह बाद वह बीमार रहती है और उसने झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। कोर्ट ने कहा कि यह भी प्रमाणित नहीं हो सका कि वह क्रूर व्यवहार करती है बल्कि उसने बीमार की सेवी की। इसलिए केस निरस्त किया जाता है।

युवक के खिलाफ पिता ने ही बयान दिए

युवती की ओर से एडवोकेट जितेंद्रसिंह ठाकुर ने पैरवी करते हुए युवक के आरोपों को गलत ठहरा दिया। एडवोकेट ठाकुर ने प्रकरण के विचारण में तलाक का केस लगाने वाले युवक के पिता के बयान कराए तो उन्होंने कहा कि विवाद के बाद लगभग पांच वर्ष तक उसकी बहू नौकरी से अवकाश लेकर उसके पुत्र के साथ रही। इस दौरान उसकी बीमार पत्नी (युवती की सास) बीमार रही तब उसकी सेवा भी की। युवक के पिता ने यह भी कहा कि उसके पुत्र ने बहू पर जो आरोप लगाए वह असत्य हैं।

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