फिलहाल भारत कोरोना वायरस के दूसरे स्टेज पर, तीसरे पर क्या होंगे हालात?

विभव देव शुक्ला

देश से लेकर दुनिया, बीते कुछ समय से एक बात की चर्चा हर जगह जारी है और वह है कोरोना वायरस। चीन से शुरू हुई इस बीमारी का असर इस कदर हुआ कि दुनिया के तमाम विकसित देश तक इसका सामना नहीं कर पा रहे हैं। हमारे देश में सैकड़ों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।
3 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक और मंत्रालय से लेकर आम जनता सभी इसका सामना करने के लिए डटे हुए हैं। इसी कड़ी में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बीमारी के बारे में बात की है।

72 लैब चल रही हैं

आईसीएमआर के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने देश में कोरोना वायरस के हालातों पर बात करते हुए कई बातें कहीं। उन्होंने कहा फिलहाल हमारे देश में सारी लैब भरी पड़ी हैं, उनमें जाँच और इलाज के लिए मरीज भरे पड़े हैं। हम इन लैब की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं, फिलहाल आईसीएमआर के तहत देश भर में 72 लैब संचालित की जा रही हैं।

अगले हफ़्ते से बढ़ेगी संख्या
यह बात बेहद साफ़ है कि हम स्टेज 2 पर हैं यानी हम बहुत ज़्यादा ख़तरे में नहीं हैं। यह बात तय है कि हम स्टेज 3 से पूरी तरह बाहर हैं लेकिन हम कोई लापरवाही मोल नहीं ले सकते हैं। हमें अपनी सारी लैब में जाँच की गुणवत्ता बढ़ानी होगी। जिससे कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा मरीजों का इलाज हो सके।
देश में मौजूद तमाम नॉन आईएमसीआर लैब भी मरीजों से भरी पड़ी हैं। यह लैब स्वास्थ्य मंत्रालय, सरकारी लैब (सीएसआईआर), डीआरडीओ, डीबीटी और मेडिकल कॉलेज के तहत आती हैं। हमारे पास ऐसी 49 और लैब हैं जिनमें अगले हफ़्ते के अंत तक जाँच शुरू हो जाएगी।

एक दिन में 1400 सैंपल
इसके अलावा हम दो थ्रूपुट सिस्टम बना रहे हैं जेपी एक तरह की रैपिड टेस्ट लैब होगी। इन दो लैब में महज़ एक दिन के भीतर लगभग 1400 सैंपल की जाँच भी हो सकती थी, इस हफ़्ते के अंत तक दोनों लैब शुरू हो जाएंगी। हमारे पास पहले से ही 10 लाख जाँचों के ऑर्डर मौजूद हैं, बाहर से आने वालों और तीर्थ यात्रियों का कोई हिसाब ही नहीं है। हमने इस मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी मदद मांगी है।

कम्यूनिटी ट्रांसमीशन का ख़तरा
आगामी 31 मार्च तक हमें हर तरह की सावधानी बरतनी पड़ेगी। कोरोना की कुल 4 स्टेज हैं, तीसरी स्टेज कम्यूनिटी ट्रांसमीशन से होती है। हम उम्मीद करते हैं ऐसे हालात न बनें। हमें अपनी सीमाओं को पूरी तरह बंद रखना होगा, सरकार को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा। लेकिन हम ऐसा भी नहीं कह सकते हैं कि कम्यूनिटी ट्रांसमीशन हो ही नहीं सकता है। इसलिए सभी को सावधानी बरतनी होगी।

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