क्या जामा मस्जिद बंद हो जाने से कोरोना वायरस पर फर्क पड़ेगा?

विभव देव शुक्ला

पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है और इस बीमारी का सबसे भयानक पहलू यह है कि हमारे देश के तमाम लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। देश में लगभग 126 लोग इस वायरस से प्रभावित हैं और 3 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। हालांकि तमाम लोग इलाज के ज़रिये ठीक भी हो रहे हैं लेकिन फिर भी बड़े पैमाने पर सावधानी बरतने की ज़रूरत है। कोरोना को लेकर जहाँ सबसे ज़्यादा बहस हो रही है ऐसी जगहों में एक है सोशल मीडिया।

जामा मस्जिद बंद करो
ट्वीटर पर काफी देर से एक ट्रेंड चल रहा है ‘जामा मस्जिद बंद करो’। ऐसे में सवाल उठता है कि जामा मस्जिद का कोरोना से क्या लेना-देना? या इस सवाल को दो और तरीक़ों से पूछा जा सकता है,
क्या जामा मस्जिद बंद कराने से कोरोना का असर कम होगा?
कोरोना का जामा मस्जिद बंद कराने से क्या संबंध है?

“हमें अल्लाह पर भरोसा है”
दरअसल बीते दिन से सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब सुर्खियाँ बटोर रहा है। वीडियो जामा मस्जिद का बताया जा रहा है, जिसमें एक समाचार समूह का पत्रकार नमाज़ अता करके लौट रहे लोगों से कुछ सवाल करता है। चूंकि देश कोरोना से जूझ रहा है इसलिए पत्रकार के सवाल कोरोना पर ही केन्द्रित थे।
वीडियो की शुरुआत में एक व्यक्ति कहता है, ‘हमें अल्लाह पर भरोसा है, दिल्ली वालों को तो क्या हिंदुस्तान वालों पर आएगी ही नहीं यह बीमारी। यह खुदाई आज़ाब है कि बुर्खे हटा दो, आज़ानें नहीं दी जाएंगी मस्जिदों से, तो भाई यह खुदाई आज़ाब है। नहीं तो अमेरिका जैसा इंटेलिजेंट देश जिसमें पास इतनी तकनीक है, उनके पास इतनी दवाइयाँ हैं वहाँ भी यह बीमारी हो रही है। यह कोई मेरी आज़ान नहीं है, यह अल्लाह की आज़ान है।’

खौफ़ मत फैलाइए
इसके बाद पत्रकार कहता है ‘मेरा कहना है थोड़ा नाक-कान-आँख भी खोल लो। सरकार जागरूकता लेकर आ रही है उस पर आप लोग ध्यान दीजिये, भीड़ में आइये चाहे जैसे आइये बस अपना ध्यान रखिए। डरिए नहीं, खौफ़ मत फैलाइए।’
फिर भीड़ में मौजूद व्यक्ति कहता है ‘मुसलमान कोई खौफ़ नहीं फैला रहा है, कोई ऐसी बात नहीं है, बाकी अपना एहतियाद भी बहुत ज़रूरी है।’ फिर वहीं मौजूद दूसरा बुजुर्ग व्यक्ति कहता है, ‘मुसलमान न मौत से डरता है और न ही बीमारी से डरता है। बीमारी और सेहत, ज़िन्दगी और मौत यह सब मालिक (अल्लाह) के हाथों में है और मुसलमान सिर्फ अल्लाह से डरता है।
अंत में पत्रकार कहता है ‘यह बीमारी बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती है। इसलिए आप अपना ध्यान सबसे ज़्यादा दो, हर सावधानी रखो और 100 साल जियो।’

मंदिर से मस्जिद हर जगह सावधानी
मामले का मजमून बेहद स्पष्ट है मस्जिद बंद करने की ज़रूरत भले नहीं है लेकिन कुछ दिन इस धार्मिक आयोजन को रोकने की ज़रूरत है। मस्जिद ही नहीं, मंदिरों पर भी यही बात लागू होती है। देश के कई राज्यों की सरकारों ने और कई महानगरों के प्रशासन से धारा 144 लगा रखी है।
कुल मिला कर यह सावधानी से ज़्यादा जागरूकता का मसला है।
जिसकी वजह भी साफ है कि सार्वजनिक स्थान पर लोग इकट्ठे न हों जिससे इस वायरस का विस्तार न हो। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों के मुताबिक भी कुछ दिन के लिए ऐसे किसी धार्मिक आयोजन पर भी रोक है जिसमें कई लोग इकट्ठा होते हों।

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