आखिर क्यों रंजन गोगोई को बेशर्म बता रहे हैं पूर्व जस्टिस

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने पूर्व रंजन गोगोई के राज्यसभा में मनोनीत होने पर आलोचना करते हुए तंज कसा है। उन्होंने गोगोई पर तीखा हमला करते हुए उन्हें बेशर्म तक कह डाला है। जो शायद किसी भी जज के लिए सामान्य बात तो नहीं है।

मार्कण्डेय काटजू ने अपने ट्वीट में कहा है, “मैं 20 साल के लिए वकील और अगले 20 साल तक जज रहा हूं। इस दौरान मैंने कई अच्छे जजों और कई बुरे जजों के बारे में अच्छे से जाना है। मैंने अभी तक भारतीय न्यायपालिका में रंजन गोगोई जैसा घटिया और बेशर्म और मानसिक (यौन) रूप से विकृत न्यायधीश नहीं देखा है। शायद की कोई बुराई हो जो इस आदमी में मौजूद नहीं था।”

दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को रंजन गोगोई के राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। भारत के 46 वें मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई पिछले साल 17 नवंबर को पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनको राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद ना सिर्फ विपक्षी पार्टियों के नेताओं बल्कि कई पूर्व मंत्रियों, पूर्व जजों और संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं।

रंजन गोगोई के राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में उनके साथी रहे जजों ने भी सवाल उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट में गोगोई के समकक्ष रहे सेवानिवृत्त जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा है कि क्या आखिरी किला भी ढह गया है? उन्होंने ये न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और अखंडता को लेकर कहा है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुरियन जोसेफ ने कहा कि वे हैरान हैं कि जिस सीजेआई ने कभी न्यायपालिका की निष्पक्षता और आजादी के लिए ऐसा साहस दिखाया था, उन्होंने ही आजादी के सिद्धांत से समझौता कर लिया। गोगोई ने न्यायपालिका की आजादी पर आम आदमी के यकीन को कम कर दिया है और यह आजादी ही भारत के संविधान के मूल में हैं।

गोगोई ने राज्यसभा जाने के बवाल को लेकर कहा है कि उन्होंने ये पद इसलिए स्वीकार किया ताकि विधायिका और न्यायपालिका में सामंजस्य बन सके। उनका कहना है कि संसद में उनकी उपस्थिति विधायिका के समक्ष न्यायपालिका और न्यायपालिका के समक्ष विधायिका का दृष्टिकोण साफ़ रखने का अवसर प्रदान करेगी।

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