कैसी है निर्भया के आरोपियों को सूली पर चढ़ाने वाले जल्लाद की निजी ज़िन्दगी

विभव देव शुक्ला

लंबे इंतज़ार के बाद 20 मार्च यानी आज की सुबह 5:30 बजे निर्भया के आरोपियों को फांसी दे दी गई। ऐसी घटना जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया था, देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा विरोध करते हुए सड़कों पर था। लेकिन इन सारी बातों के बावजूद आज फैसला हो गया, इंसाफ पूरा हुआ। कहानी यहीं खत्म नहीं होती है क्योंकि ऐसी कहानियों की ज़मीन में तमाम किरदार ऐसे होते हैं जिन पर कम ही चर्चा होती है।

लंबे समय से इंतज़ार था
ऐसा ही एक किरदार है वह जल्लाद जिसने निर्भया के साथ ज़्यादती करने वालों को तिहाड़ जेल में फांसी पर चढ़ाया। 57 साल के पवन जल्लाद ने निर्भया के सभी आरोपियों को फांसी पर चढ़ाया, इसके बाद उन्होंने इस पर मीडिया वालों से बात भी की। पवन ने कहा ज़िन्दगी में पहली बार मैं इतना खुश हूँ कि मैंने 4 आरोपियों को फांसी पर चढ़ाया। मैं बहुत लंबे समय से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था, इसके लिए मैं ईश्वर और तिहाड़ जेल प्रशासन को शुक्रिया कहना चाहता हूँ।

नहीं करते ज़्यादा लोगों से बात
निर्भया के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए तिहाड़ प्रशासन ने ही पवन जल्लाद को चुना था। पवन पूरे उत्तर प्रदेश में इकलौते अधिकृत जल्लाद हैं और वह मेरठ जेल से जुड़े हुए हैं। पवन को 3000 रुपए का मासिक वेतन मिलता है। उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में जल्लाद बनने के अलावा कुछ और सोचा ही नहीं क्योंकि पवन के पिता और दादा दोनों ही जल्लाद थे।

पिता और दादा भी रहे जल्लाद
पवन जब से समझदार हुए हैं तब से वह यह सब देख रहे हैं। पवन के दादा लक्ष्मण और पिता कल्लू को साल 1989 में इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी देने की ज़िम्मेदारी मिली थी। इसके अलावा पवन के पिता ने खूंखार अपराधी रंगा और बिल्ला को भी फांसी पर चढ़ाया था। अभी से लगभग 3 साल पहले पवन को निठारी कांड के आरोपी सुरेन्द्र कोहली को फांसी पर चढ़ाने का ज़िम्मा मिला था।

बेटे ने चुनी अलग राह
पवन मेरठ के बाहरी इलाके में रहते हैं और ज़्यादा लोगों से बात करना पसंद नहीं करते हैं। पवन के परिवार में कुई 7 लोग हैं लेकिन उनके बेटे ने वह काम नहीं किया जो वह करते थे। फिलहाल उनके बेटे सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और वह किसी भी सूरत में फांसी देने का काम नहीं करना चाहते हैं। उनका आने वाला कल कुछ भी हो लेकिन पवन जल्लाद ने इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर दिया है।

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