जब नवाब बानो का नाम राज कपूर को मुश्किल लगने लगा तब निम्मी का जन्म हुआ

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लड़की सालों इंतज़ार करती है। सालों बाद लड़का अपना वादा पूरा करने लड़की के पास आता है लड़की के बोल उसके आंखों से फूटने लगते हैं। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड में पहली झलक मिलने वाली निम्मी की फ़िल्म ‘बरसात’ की। निम्मी लम्बे अरसे से बीमार चल रही थीं। बीते बुधवार को उनका निधन हो गया।

वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रही थीं। उन्हें सांस की बीमारी थी। उन्होंने अंतिम सांस मुंबई के सरला नर्सिंग होम में लीं। निम्मी 50 और 60 के दशक में बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में से एक थीं। हालांकि वो बॉलीवुड जगत में बहुत लम्बे समय तक सक्रिय नहीं रहीं।

वहीं ऋषि कपूर ने उन्हें याद करते हुए लिखा है, “भगवान आत्मा को शांति दे। शुक्रिया निम्मी आंटी ‘बॉबी’ के प्रीमियर पर शुभकामनाएं और प्यार देने के लिए। आप आरके (राज कपूर) परिवार का हिस्सा रही हैं। ‘बरसात’ आपकी पहली फिल्म थी। अल्लाह आपको जन्नत नसीब करे। आमीन।”

निम्मी नाम के पीछे की कहानी

राजकपूर ने निम्मी को पहली बार फिल्म जगत से रूबरू करवाया था। लेकिन इससे पहले निम्मी को भी बहुत कुछ बदलना पड़ा था। वैसे पहले के समय में अधिकतर बदलाव नाम को लेकर किये जाते थे तो ये एक्सपेरिमेंट निम्मी के साथ भी हुआ। निम्मी का असली नाम नवाब बानो था लेकिन नवाब बानो नाम राज कपूर को बहुत मुश्किल लगता था बोलने में, इसलिए उनका नाम निम्मी रख दिया गया।

जब पार्टीशन के समय घर पकिस्तान के घेरे में आ गया

निम्मी के पिता मेरठ में मिलट्री कॉन्ट्रैक्टर थे। उनकी मां वाहिदान भी एक एक्ट्रेस थीं। उस वक्त के दिग्गज डायरेक्टर महबूब खान से भी वाहिदान की अच्छी जान-पहचान थी। बचपन में निम्मी अपनी अम्मी के साथ ही रहती थीं। लेकिन जब निम्मी सिर्फ 11 साल की थीं, वाहिदान का इंतकाल हो गया। निम्मी अपनी नानी के साथ एबटाबाद में रहने लगीं। पार्टिशन हुआ, तो एबटाबाद पाकिस्तान में चला गया था। लेकिन नानी ने मुंबई को चुना और अपनी बेटी सहित निम्मी को लेकर मुंबई पहुँच गईं। अब निम्मी और उनकी नानी, निम्मी की मौसी के साथ रहने लगीं।

एक गलती और फ़िल्मी करियर ध्वस्त

नवाब बानो के नाम जानी जाने वाली निम्मी ने यूं तो कई सफल फिल्मों में काम किया था। लेकिन बताया जाता है कि उनकी एक गलती के चलते उनका पूरा करियर बर्बाद हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार यह किस्सा 1963 की फिल्म ‘मेरे महबूब’ से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्होंने लीड रोल की बजाय सेकंड लीड रोल चुना था और उनका यही फैसला उनके करियर के लिए बुरा साबित हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो ‘मेरे मेहबूब’ के डायरेक्टर हरमन सिंह रवैल ने निम्मी को फिल्म में लीड रोल ऑफर किया। लेकिन वे फिल्म में राजेंद्र कुमार की बहन का किरदार निभाना चाहती थीं, जो कि सेकंड लीड रोल था।

इस बाबत डायरेक्टर ने समझाया लेकिन वो नहीं मानी। इसके बाद फिल्म में उनकी जगह साधना को बतौर लीड एक्ट्रेस लिया गया और उन्हें उनकी पसंद के मुताबिक सेकंड लीड में रखा गया। फिल्म सुपरहिट हुई और साधना का करियर चल पड़ा। वहीं इस फिल्म के बाद निम्मी को लीड रोल मिलना कम हो गए और धीरे-धीरे उनका करियर खत्म हो गया।

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