प्रत्येक तीन किलोमीटर पर एक विशेष कोरोना हॉस्पिटल जरूरी

विनोद शर्मा | इंदौर

इंदौर कोरोना संक्रमण में पूरे देश में हाई अलर्ट पर है। शहर में अब तक 17 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। संदिग्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पॉजिटिव मरीजों के घरों को देखे तो संक्रमण पूरे शहर में फैला दिखेगा। प्रशासन ने संक्रमितों के घर से तीन किलोमीटर तक के इलाके को कंटेनमेंट एरिया (जहां से आने जाने वालों की स्क्रीनिंग होगी और घर से बाहर निकलने पर भी कड़ी सख्ती है) घोषित कर दिया है। सबसे बड़ी दिक्कत लोगों के सामने सही हॉस्पिटल में पहुंचने की है। शहर के कई हॉस्पिटल कोरोना के लक्षण के नाम पर ही मरीजों को देखने तक से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में परिजन कई अस्पतालों के चक्कर लगाकर एमवाय तक पहुंच रहे हैं। जरूरी है कि सरकार शहर के हर तीन किलोमीटर के इलाके में एक हॉस्पिटल को विशेष तौर पर सिर्फ कोरोना हॉस्पिटल घोषित कर दे। इससे लोगों को जल्द इलाज मिलेगा और कई अस्पतालों और शहर की आबादी के बीच से मरीज के गुजरने से फैलने वाले संक्रमण पर भी रोक लगेगी। अभी अस्पतालों में कोरोना और अन्य बीमारी के मरीज भी हैं, इससे भी संक्रमण का खतरा है। चिन्हित हॉस्पिटल के अलावा बाकी में दूसरे मरीजों का इलाज होगा, तो वे भी परेशान नहीं होंगे।

इंदौर में गुरुवार को 9 कंटेनमेंट एरिया घोषित किए गए थे, ये संख्या शुक्रवार को बढ़कर 11 हो गई। यानी कंटेनमेंट एरिया के दायरे में पूरा शहर आ गया है। ऐसे में मरीज को लेकर परिजन कैसे जाएंगे, क्योंकि निजी वाहनों पर प्रतिबंध हैं, और ये संक्रमण के वाहक भी बन सकते हैं। कोरोना के विशेष हॉस्पिटल हर तीन किमी पर होंगे तो व्यवस्था सुचारू रूप से चलेगी। इन अस्पतालों के हेल्पलाइन नंबर भी होने चाहिए।

ऐसे पल्लू में मुंह ढंकने से नहीं रुकेगा संक्रमण

अभी ये हो रहा है कि कोरोना लक्षण का शक होने पर मरीज आसपास के कई अस्पतालों में भटक रहा है, कई किलोमीटर और बड़ी आबादी पार करके एमवाय अस्पताल तक पहुंच रहा है, ये घातक है। जरूरी ये है कि ऐसे मरीजों को एम्बुलेंस में ही घर से लाया जाए और नजदीक के विशेष कोरोना हॉस्पिटल में रखा जाए।

विशेषज्ञों ने भी संक्रमित इलाकों में ही अस्पताल की जरूरत को उचित बताया

कंटेनमेंट एरिया में ही अस्पताल की व्यवस्था होनी चाहिए और वहां कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त और पुख्ता इंतजाम भी होना चाहिए। ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम से कम हो। निजी अस्पतालों को लेकर प्रशासन को अभी से माइक्रो प्लानिंग करनी पड़ेगी। डॉ. शरद पंडित, पूर्व सीएमएचओ

गोकुलदास अस्पताल अधिग्रहीत हुआ है। ऐसे ही दूसरे अस्पताल भी होने चाहिए। इन अस्पतालों को सिर्फ संक्रमितों के इलाज के लिए रखना चाहिए। तीन किमी के दायरे में ही अस्पताल हो, ताकि संक्रमण अन्य जगहों पर न फैले। डॉ. आनंद गोकुलदास

प्रशासन ने फैसला लेने से पहले कुछ सोचा होगा, लेकिन समस्या बड़ी है। तीन किलोमीटर के दायरे में अस्पताल चिन्हित होना ही चाहिए, जहां सिर्फ कोरोना संक्रमितों का ही इलाज हो।डॉ. श्याम ईनानी, क्योरवेल हॉस्पिटल

जब निजी हॉस्पिटल हैं, तो स्कूलों को अस्पताल बनाने का फैसला क्यों

शुक्रवार को जिला प्रशासन ने रानीपुरा और चंदननगर के स्कूलों में अस्थायी हॉस्पिटल बनाए, पर कोई भी स्कूल हॉस्पिटल जैसी सुविधाएं नहीं दे सकेगा। हॉस्पिटल तब बनाए जाते हैं, जब शहर में सारे हॉस्पिटल भर जाएं। इंदौर में ऐसी स्थिति नहीं है। सरकार निजी अस्पतालों को अधिग्रहीत करने में हिचक क्यों रही है? विशेषज्ञ भी इससे सहमत नहीं है।

वॉट्सएप कॉल पर ले सकते हैं परामर्श

प्रशासन ने टेलीमेडिसिन हेल्पलाइन शुरू की है। एक्सपर्ट डॉक्टरों से परामर्श के लिए लोग मोबाइल नंबर 7489244895 पर वॉट्सएप वॉइस या वीडियो कॉल कर सकते हैं। सूचना के आधार पर मेडिकल मोबाइल यूनिट घर-घर जाएगी। लोगों का चेकअप करेगी। ताकि लोगों को खुद अस्पतालों में न जाना पड़े। जरूरी होने पर टीम उन्हें संबंधित अस्पताल में पहुंचाएगी।

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