बिहार से लौटे समूह को अस्पतालों में फटकार, तीन घंटे बाद बोले- घर जाओ, वही जांच करेंगे

अंकुर जायसवाल | इंदौर

सजगता की सजा… इस समूह ने रास्ते से ही जिला प्रशासन के आला अफसरों को सूचना दे दी थी, ये लोग अपने घर जाने के पहले मेडिकल संतुष्टि चाहते थे ताकि संक्रमण शहर के अन्य लोगों तक न फैले

देश में इंदौर हाई अलर्ट पर है। बावजूद इसके कोरोना की जांच या इस पर सही सलाह मिल पाने में कई मुश्किलें हैं। इसकी हकीकत शनिवार को सामने आ गई। गया से पिंडदान करके लौटे 12 लोगों का समूह जांच व बाकी मदद के लिए अस्पताल दर अस्पताल भटकता रहा। सभी परिजनों के पास जाने के पहले संतुष्ट हो जाना चाहते थे, ताकि संक्रमण न फैले। जब ये कोरोना के लिए अधिग्रहित गोकुलदास अस्पताल पहुंचे तो उन्हें झिड़ककर एमवाय अस्पताल भेज दिया गया। वहां आधे घंटे खड़ा रखने के बाद कहा गया कि सीएमएचओ कार्यालय जाओ, हमें कुछ नहीं पता। इस बीच एक कॉल आया कि आप लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर मिलो। सभी वहां टीम के इंतज़ार में खड़े रहे। तीन घंटे से ज्यादा भटकने के बाद उन्हें कहा गया कि आप लोग विदेश से नहीं आए हैं, लिहाजा किसी तरह की जांच की जरूरत नहीं है, घर जाइए, वही आकर जांच कर लेंगे।
डॉक्टर बोले- विदेश से नहीं आए, इसलिए ज्यादा जांच की जरूरत नहीं

गया से आने की पीड़ा बताते हुए श्याम नगर निवासी अश्विन मिश्रा ने बताया कि कोरोना की जांच के लिए वे खुद सबसे पहले गोकुलदास अस्पताल पहुंचे। वहां मौजूद महिला डॉक्टर ने कहा, सबका इलाज एक साथ नहीं कर सकते। आप लोग किसी और अस्पताल में चले जाएं, वहीं जांच कराएं।

मिश्रा ने कहा, हमने कहा कि कुछ लोगों को सर्दी है, तो कहने लगे ये एसी बस में बैठने के कारण हो गई होगी। पर किसी भी तरह से उन्होंने हमारी जांच नहीं की। यहां से वे मजबूरन एमवाय अस्पताल पहुंचे। लेकिन उन्हें वहां भी कोई जिम्मेदार नहीं मिला। एक-डेढ़ घंटे तक भटकने के बाद भी जांच नहीं हुई तो उन्हें वहां से भी लौटना पड़ा। वे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे। जहां मौजूद डॉक्टर प्रशांत ने कहा आप लोग विदेश से थोड़े ही लौटे हैं। उन्होंने केवल टेंपरेचर जांचा और 14 दिन तक क्वारंटाइन रहने को कहा। मिश्रा ने कहा उन्होंने जिला प्रशासन को शनिवार सुबह पहुंचने की जानकारी एक दिन पहले शुक्रवार रात में ही दे दी थी।

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