जोखिम में जान, फर्जी पता लिखवा रहे कोरोना पॉजिटिव

संतोष शितोले | इंदौर

नगर निगम ने कहा- गलत पते के कारण क्षेत्र सेनेटाइज नहीं हो पा रहे तो पुलिस ने क्षेत्र को कंटेनमेंट करने में परेशानी जताई

कोरोना से बचाव के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है, लेकिन पॉजिटिव मरीज जांच के पहले अपना पता गलत लिखवा रहे हैं। इसके चलते नगर निगम और पुलिस को भारी परेशानी उठाना पड़ रही है। निगम चिह्नित इलाके को सेनेटाइज नहीं कर पा रहा, वहीं पुलिस के लिए उस क्षेत्र को कंटेनमेंट करना चुनौती बन रहा है। जानकारों का कहना है इस वजह से मरीज की जान तो खतरे में है ही, दूसरे कई मरीजों के भी संक्रमित होने का खतरा है।

ताजा मामला शनिवार देर रात वॉयरोलॉजी लैब से आई रिपोर्ट का है। इसमें इंदौर के चार और उज्जैन के एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इन्हीं में एक 48 वर्षीय व्यक्ति निवासी 19, चंद्रपुरी कॉलोनी, मूसाखेड़ी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को उसका पता, परिवार, रिश्तदारों व नजदीकी लोगों को क्वारंटाइन कर उसके घर व आसपास के क्षेत्र को सेनेटाइज करना था। रात को लिस्ट जारी होने के बाद रविवार सुबह आजाद नगर के दो पुलिसकर्मी बाइक पर पता ढूंढ़ते हुए जब 19, चंद्रपुरी कॉलोनी पहुंचे तो वहां दोमंजिला उक्त मकान की पहली व दूसरी मंजिल पर किराएदार रहते पाए गए, जबकि ग्राउंड फ्लोर के दरवाजे पर ताला था।

पुलिस ने लोगों से बात की तो पता चला कि यहां कोई 48 वर्षीय व्यक्ति (कोरोना से जुड़ा) नहीं रहता। मकान मालिक ने बताया उसने चार महीने पहले यह मकान संबंधित से खरीदा था। इन चार महीनों में उसे सभी किराएदारों की जानकारी है, लेकिन उक्त व्यक्ति को वह नहीं जानता। पुलिस के समक्ष एक परेशानी यह भी है कि अब विभाग ने मरीजों की पहचान (नाम) दस्तावेजों पर देना बंद कर दी है, ऐसे में संबंधित पॉजिटिव मरीज का नाम क्या है, यह भी ज्ञात नहीं हो पाता। अब सवाल यह है कि वह व्यक्ति, जो पॉजिटिव होकर भर्ती है, यहां कब रहा या उसने गलत पता लिखाया इसकी तस्दीक के लिए कोई सिस्टम नहीं। चौंकाने वाली बात यह कि शुक्रवार दोपहर तक स्वास्थ विभाग या नगर निगम की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। देर शाम निगम की टीम पहुंची और छिड़काव कर चली गई। इधर, अखबारों में उक्त पता प्रकाशित होने पर क्षेत्र के लोगों में पहले तो काफी घबराहट रही, लेकिन जब विभागों ने सुध नहीं ली तो उन्होंने मान लिया कि मरीज ने पता गलत लिखवाया।

एक स्वास्थ अधिकारी के मुताबिक मरीज या उसके परिजन जो नाम-पता लिखवाते हैं, वही वॉयरोलॉजी लैब रैफर करते हैं। हमारी प्राथमकिता इलाज की होती है। फिर रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने की स्थिति में संबंधित मरीज का नाम नहीं बताया जाता। अधिकारी ने स्वीकारा कि इसके पूर्व भी कुछ मरीजों ने पता गलत लिखाया। उन्होंने पहले हाथीपाला, फिर रानीपुरा भी लिखवाया, जबकि दोनों क्षेत्रों में डेढ़ किमी का फासला है।

एमवाय अस्पताल के मेल नर्स पर शंका

इस बीच पता चला है कि 19, चंद्रपुरी कॉलोनी, मूसाखेड़ी में काफी समय पहले डुंगरपुर (राजस्थान) का एक युवक किराए से रहता था। वह एमवाय अस्पताल के चेस्ट सेंटर में मेल नर्स है। उक्त मकान खाली कर उसी क्षेत्र में रहने चला गया। इन दिनों वह गायब है। नजदीकी लोगों का कहना है कि वह भी संक्रमण की चपेट में आ गया होगा और अस्पताल में पूर्व का पता लिखा दिया।

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