जान पर खेलकर काम कर रहा है मेडिकल स्टाफ और परिजन शव छोड़कर भाग गए

कीर्ति राणा | इंदौर

एक अन्य मरीज के परिजन ने पीपीई किट की मांग की, फिर ताबूत को ले गए

मेडिकल कॉलेज का स्टाफ इंदौर को बताने में एक तरह से जान झोंककर कोरोना संक्रमित और संदिग्ध मरीजों की सेवा में जुटा हुआ है लेकिन स्टाफ को मरीजों और उनके परिजनों का उतना ही सहयोग नहीं मिल रहा है। जिन मरीजों की पिछले दिनों मौत हुई उनके परिजनों ने शव को हाथ लगाना तो दूर शव छोड़कर ही भाग गए। बाद में इन परिजनों को ढूंढवाया, समझाया तो संक्रमित होने की शंका जाहिर कर मांग कर डाली कि हमे भी पीपीई किट उपलब्ध कराएं, तब शव ले जाएंगे।

एक अन्य मरीज को तो उसके परिजन छोड़ कर ही भाग गए। अन्य जिले के इस मरीज को उसकी पत्नी और बेटा उपचार के लिए लेकर आए थे। जांच रिपोर्ट में जब उसके संदिग्ध होने की पुष्टि हुई तो पत्नी और बेटा मरीज को छोड़ कर ही चले गए। एमआरटीबी में दाखिल मरीजों और उनके परिजनों द्वारा इस तरह के वीडियो मैसेज भी वायरल कराए जा रहे हैं कि उनकी देखभाल नहीं होती, समय पर खाना तक नहीं दिया जाता। इसके विपरीत एमवायएच के सूत्र कहते हैं सारे मरीजों को चाय-नाश्ता-दूध के साथ ही तीन टाइम खाना भी दिया जा रहा है। एमवायएच का स्टाफ प्रभावित मरीजों की जान बचाने के लिए 16 से 20 घंटे जुटा है लेकिन फिर भी इनके प्रति मरीजों-खासकर उनके परिजनों का व्यवहार ठीक नहीं रहता। दम तोड़ चुके मरीजों के शव पैक कर, एंबुलेंस में रवाना करने तक वार्डबॉय आदि सहयोग को तत्पर रहते हैं, लेकिन मृतकों के परिजन ताबूत तक को हाथ नहीं लगा रहे। एक जूनियर डॉक्टर ने कहा शव ले जाने में इतनी एहतियात बरतने वाले परिजनों को हम बार बार समझाते हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करंे, यही बात वे पहले ही क्यों नहीं मानते, क्यों हमारे कहने का विरोध करते हैं।

किट का संकट नहीं, जिनके लिए जरूरी है उन्हें ही दे रहे

कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में लगे स्टाफ को पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट किट पहन कर ही उपचार करना है, डब्ल्यूएचओ की इस गाइड लाइन का अक्षरश: पालन हो रहा है।इस किट में फुल बॉडी सूट, हेड कवर केप, फेस शिल्ड ट्रांसप्लांट, हेलमेट, हैंड ग्लब्ज, सेनेटाइजर, एन-95 मॉस्क,एन-71 मॉस्क, साधारण मॉस्क और सेनेटाइजर रहता है। मरीज के उपचार से पहले तैनात स्टॉफ को ये सारी सामग्री इसलिए पहनना जरूरी है ताकि संक्रमित होने का खतरा टाला जा सके। निजी क्लिनिक में मरीज के उपचार के दौरान संक्रमित होने के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती (अब एमआरटीबी में शिफ्ट) एक डॉक्टर की देखभाल के दौरान पीपीई किट वाली सतर्कता न बरतने के कारण मेडिकल स्टॉफ के तीन सदस्यों को आइसोलेशन में रखना पड़ा था।यही कारण है कि कोरोना वाले मरीजों या मृतकों को लाने-ले जाने के दौरान एंबुलेंस चालक को भी इस किट का इस्तेमाल अनिवार्य कर गिया गया है।जो मेडिकल-नर्सिंग या फोर्थ क्लास स्टॉफ सीधे कोरोनो प्रभावित मरीजों से नहीं जुड़ा है उन्हें बचाव के लिए एचआईवी किट दे रहे हैं। इस किट में गाउन, चश्मा, पैर के मौजे, ग्लब्ज और मॉस्क रहता है।

मेडिकल इक्यूपमेंट लेकर हैदराबाद आया विशेष विमान

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल पर मंगलवार शाम एक विशेष कार्गो विमान करीब एक टन मेडिकल इक्युपमेंट और राहत सामग्री लेकर पहुंचा। हैदराबाद से आया यह विमान इंदौर में सामग्री अनलोड करने के बाद मुंबई रवाना हो गया। एयरपोर्ट डायरेक्टर अर्यमा सान्याल ने बताया यह फ्लाइट शाम 7.14 बजे हैदराबाद से इंदौर आकर 7.51 बजे मुंबई रवाना हुई। दूसरी उड़ान मुंबई से दिल्ली, पटना और कोलकाता होकर वापस मुंबई पहुंची। विमान के जाने के बाद कार्गो को प्रोसेस करने के साथ ही पूरे क्षेत्र का कोरोना के मद्देनजर फ्यूमिगेशन और सेनेटाइजेशन भी किया गया। एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बताया कि यह इंडिगो का यात्री विमान था, लेकिन इसमें सिर्फ कार्गो लाया गया। इसका वजन 946.5 किलो है। इसमें रिलायंस जीयो इंफोकॉम का 890 किलो और फिनटेक कॉर्पोरेशन का 32 किलो मेडिकल इक्यूपमेंट मुंबई से और साढ़े 24 किलो राहत सामग्री के रूप में बैंगलुरू से आया था। एयरपोर्ट पर यात्री उड़ानों का संचालन बंद होने से सिर्फ 25 प्रतिशत स्टाफ के साथ काम किया जा रहा है, इसलिए सीमित स्टाफ के साथ ही इस उड़ान का संचालन और कार्गो से जुड़ा काम किया गया।

न्यू ओपीडी में काउंसलिंग भी : एमवायएच में न्यू ओपीडी मुख्य रूप से कोरोना से जुड़े मरीजों के लिए शुरु की गई है।इस ओपीडी में चेकअप के लिए शिफ्टवार 9 डॉक्टरों को तो तैनात किया ही गया है, ऐसे मरीजों की काउंसलिंग के लिए 4 डॉक्टर भी पदस्थ किए गए हैं। यह इसलिए जरूरी समझा गया कि हल्की सी खांसी-बुखार के शिकार मरीज के मन में भी यह भय बैठ जाता है कि वह कोरोना का शिकार हो गया है। ऐसी गलतफहमी को दूर करने के लिए उसकी काउंसलिंग जरूरी होती है।
मैरिज गार्डन-होटल आइसोलेशन सेंटर: ऐसे मरीज जिनके परिवारों को भी 14 दिन के लिए आइसोलेशन में रखना जरूरी हो उनके लिए बायपास के गार्डन और होटल चिह्नित किए गए हैं। फिलहाल बायपास स्थित होटलों में 700 व्यक्तियों को रखे जाने के मान से तैयारी की गई है।

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