आरबीआई तीन महीने की EMI टाल रही है लेकिन इस शर्त पर

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले रोज लोन लेने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत की घोषणा की है।

दरअसल आरबीआई ने सभी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्‍तीय संस्‍थाओं (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के साथ अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों को टर्म लोन की किस्‍त तीन महीने तक टालने के लिए कहा था। लेकिन क्या ये वाकई में राहत है?

आरबीआई ने अपने बयान में कहा है, “सभी कॉमर्शियल, क्षेत्रीय, ग्रामीण, एनबीएफसी और स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों को किस्‍त के भुगतान पर 3 महीने का मोरैटोरियम देने की अनुमति दी जाती है। यह वैसे सभी लोन के लिए प्रभावी होगी जिनकी ईएमआई 31 मार्च को जानी है।”

बात सिर्फ तीन महीने की ईएमआई टालने की नहीं है। अगर आप मोराटोरियम चुनते हैं तो इससे आपको होम लोन पर ज्यादा का भुगतान करना होगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं इस बारे में

दूसरी ओर विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कोरोनावायरस के बाद घोषित लॉकडाउन की इस मुश्किल घड़ी में पैसे रहने के बावजूद EMI का भुगतान टालना आपके लिए भारी पड़ सकता है। निवेश एवं टैक्स मामलों के विशेषज्ञ बलवंत जैन के मुताबिक ऐसा करना लोगों के पॉकेट का बोझ बढ़ा सकता है। वास्तव में हाल में रिजर्व बैंक ने तमाम तरह के रिटेल लोन की EMI, Credit Card के बिल के भुगतान पर तीन माह के मोराटोरियम की घोषणा की। 

जैन के मुताबिक आरबीआइ का यह फैसला ऐसे लोगों के लिए है, जिनका कैश फ्लो लॉकडाउन की वजह से रूक गया है। ऐसे लोग बाद में कैश फ्लो शुरू होने पर बकाये का भुगतान कर पाएंगे और उनका CIBIL Score भी खराब नहीं होगा। बकौल जैन लोगों को यह समझने की जरूरत है कि इन तीन महीनों में अगर आप EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं करते हैं तो आपको इस अवधि का ब्याज देना होगा, और यह आपके पॉकेट पर भारी पड़ेगा।

मोराटोरियम कैसे काम करेगा?

इसके बारे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट कहती है कि मान लीजिए कि 30 लाख का लोन जो आने वाले 15 साल में पूरा होने वाला है। इस पर जो एडिशनल इंट्रेस्ट होगा वो लगभग 2.34 लाख होगा। यह आठ ईएमआई के बराबर है। उसी तरह 6 लाख का लोन है। जो कि 54 महीने में पूरा होने वाला है उस पर आपको लगभग 19 हजार एडिशनल इंट्रेस्ट पे करना होगा। जो कि लगभग 1.5 ईएमआई के बराबर है। ये कैलुकेशन इस आधार पर है कि इस दौरान इंट्रेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं होगा और कोई प्री-पेमेंट नहीं होगा। एसबीआई ने ये भी कहा है कि ग्राहक जब तक उनसे मोराटोरियम के लिए नहीं कहते हैं तबतक उनके खाते से ईएमआई कटती रहेगी।

वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने इस मामले में ड्यूल पॉलिसी अपनाई है। कुछ लोन के मामले में मोराटोरियम अपने आप लागू हो जाएगा। जबकि अन्य लोन की ईएमआई कटती रहेगी। बैंक का कहना है कि होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन के मामले में ये उम्मीद की जाती है कि कस्टमर्स पेमेंट जारी रखेंगे। उनके खाते से ईएमआई कटती रहेगी, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड, सेल्फ हेल्प ग्रुप, खेती किसानी के लिए लिया गया लोन, स्मॉल बिजनेस लोन पर मोराटोरियम अपने आप लागू हो जाएगा।

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