50 करोड़ लोगों को गरीबी में धकेल सकता है कोरोना : ऑक्सफैम

लंदन

ऑक्सफैम ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर कहर बरपाया है और लगभग 50 करोड़ लोगों को गरीबी में धकेल सकता है। इस वैश्विक महामारी के फैलने से अब तक 88,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अगले सप्ताह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) / विश्व बैंक की आगामी वार्षिक बैठक से पहले चैरिटी संस्था द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में घरेलू आय और खपत में कमी के कारण वैश्विक गरीबी पर कोरोना वायरस संकट के प्रभाव का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि तेजी से सामने आ रहा आर्थिक संकट 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से गहरा है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि कोरोना वायरस के कारण 1990 के बाद पहली बार वैश्विक गरीबी बढ़ सकती है। यह कुछ देशों को गरीबी के उसी स्तर पर वापस ला सकता है, जो तीन दशक पहले देखा गया था। रिपोर्ट के लेखकों ने विश्व बैंक की विभिन्न गरीबी रेखाओं जैसे प्रतिदिन 1.90 डॉलर या उससे कम पर अत्यधिक गरीबी से लेकर प्रतिदिन 5.50 डॉलर पर उच्च गरीबी रेखा को ध्यान में रखते हुए कई परिदृश्यों के माध्यम से अपने अनुमानों को सामने रखा है। सबसे गंभीर परिदृश्य के तहत आय में 20% गिरावट होने से अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या दुनिया भर में 434 मिलियन से 922 मिलियन तक बढ़ जाएगी। इसी परिदृश्य में 5.50 डॉलर के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 548 मिलियन से 4 अरब तक बढ़ेगी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में 2 अरब से अधिक अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को बीमारी के दौरान वेतन मिलने की सुविधा नहीं है। विश्व बैंक ने पिछले सप्ताह कहा था कि यदि स्थिति बिगड़ी तो पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में गरीबी 11 मिलियन लोगों तक बढ़ सकती है।

छह सूत्रीय कार्ययोजना का प्रस्ताव पेश किया

कोरोना वयरस के असर को कम करने में मदद करने के लिए ऑक्सफैम ने एक छह सूत्रीय कार्ययोजना का प्रस्ताव किया है। जो जरूरतमंदों को नकद अनुदान और राहत मुहैया कराएगी। इसके साथ ही कर्ज को माफ करना, आईएमएफ समर्थन ज्यादा बढ़ाना और मदद भी शामिल है।

कुल मिलाकर दुनिया भर की सरकारों को विकासशील देशों की मदद करने के लिए कम से कम 2.5 खरब डॉलर जुटाने की जरूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमीर देशों ने दिखाया है कि संकट के इस समय में वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं का समर्थन करने के लिए खरबों डॉलर जुटा सकते हैं। फिर भी जब तक विकासशील देश भी इस स्वास्थ्य संकट से लड़ने में सक्षम नहीं होते हैं तब तक आर्थिक संकट जारी रहेगा। अमीर और गरीब सभी देशों को इससे और भी ज्यादा नुकसान होगा।

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