ऐसे कई केस जिनमें पता ही नहीं चला व संक्रमित हो गए

संतोष शितोले | इंदौर

पुलिस, मेडिकल, स्वास्थ्य, व्यवसाय सहित कई पेशे के लोग हुए संक्रमित

शहर में तेजी से पसरती कोरोना महामारी गहरी चिंता का विषय बनती जा रही है। स्वास्थ्य, प्रशासन, पुलिस, नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी इसे नियंत्रित करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। संक्रमित लोगों की ट्रेवल व कांटेक्ट हिस्ट्री, संबंधित लोगों को आइसोलेट, सेनेटाइजेशन, नए एपिसेंटर व कंटेनमेंट एरिया घोषित कर तेजी से इस पर नियंत्रण का काम चल रहा है, लेकिन संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है। खास बात यह कि अब संक्रमण का कोई दायरा नहीं रहा और उसने पुलिस, मेडिकल, स्वास्थ्य, व्यवसाय सहित कई विभाग और पेशे से जुड़े लोगों को चपेट में ले लिया। अब तक 23 लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। कई तो ऐसे हैं, जिन्हें संक्रमण कैसे हुआ, इसका सोर्स ही पता नहीं चला।

मेडिकल : कोरोना को चुनौती दी तो डॉक्टर को लील लिया

कोरोना संदेही संक्रमित मरीजों का सबसे पहले एमवाय अस्पताल के चेस्ट वार्ड में आइसोलेशन में इलाज चला। यहीं से मेल नर्स राजेश असरावा चपेट में आ गए। चार दिन पहले ही वे सकुशल घर लौटे, जो विरले उदाहरणों में से एक हैं। उनके साथ ड्यूटीरत तीन स्टाफ को भी प्रारंभिक तौर पर आइसोलेट किया था। दूसरी ओर गुरुवार को शहर के डॉ. शत्रुघ्न पंजवानी की मौत हो गई। उन्होंने एक हफ्ते पहले वीडियो जारी कर खुद को सुरक्षित बताया था। बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग के सैकड़ों डॉक्टर, नर्स आदि अभी अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं।

मीडिया : कवरेज में जुटे तीन पत्रकार चपेट में, एक की मौत

मीडिया में पहला मामला इंदौर का नहीं बल्कि भोपाल के एक पत्रकार का है, जो संक्रमित होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। बुधवार को भोपाल के ही एक चैनल के पत्रकार को संक्रमण हुआ, जबकि इलाजरत हाटपीपल्या के पत्रकार इकबाल की मौत हो गई। हालांकि इंदौर मीडिया पूर्ववत सावधानी बरत रहा है और गुरुवार से प्रेस क्लब भी लॉकडाउन कर दिया गया।

पुलिस विभाग : सेवा में लगे ये पुलिस अधिकारी भी हुए संक्रमण के शिकार

कर्फ्यू में कानून व्यवस्था में जुटे जूनी इंदौर थाना टीआई सबसे पहले संक्रमण की चपेट में आए, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद संयोगितागंज टीआई को संक्रमण हुआ। इसी कड़ी में जूनी इंदौर थाने का हेड कांस्टेबल संक्रमित हुआ और इसके बाद एक एडिशनल एसपी आए। ये तीनों आइसोलेशन में हैं तथा रिपोर्ट आना बाकी है।

व्यवसायी भी नहीं बच सके संक्रमण से

तीन दिन पहले शहर के बड़े पुस्तक विक्रेता प्रदीप खंडेलवाल की कोरोना से मौत हो गई। यहां यह बताना उचित होगा कि उनकी पहली रिपोर्ट नेगेटिव आई थी और स्वस्थ भी होने लगे थे, लेकिन फिर संक्रमण बढ़ा और उनकी मौत हो गई। इसी तरह दवा बाजार के एक डिस्ट्रीब्यूटर की भी बुधवार को मौत हो गई।

गृहिणियां : संक्रमण ने दी बाहर से आमद?

खास बात यह कि शहर में 213 लोग संक्रमित पॉजिटिव पाए गए। इनमें 30 से ज्यादा वे महिलाएं हैं जो गृहिणियां हैं। कई तो मुस्लिम हैं। जाहिर है कि परिवार में किसी के संक्रमित होने के कारण ये भी चपेट में आईं। वैसे कोरोना ने 3 से 17 वर्ष तक के 25 से ज्यादा लोगों को भी शिकार बनाया, जबकि 60 से 84 वर्ष तक के बुजुर्ग भी हैं।

इनकी जिंदगी लगी है दांव पर- कोरोना और कर्फ्यू में स्वास्थ्य, पुलिस, प्रशासन, नगर निगम, मीडिया, दवाई विक्रेता, दूध व्यवसायी, बड़े किराना व्यापारी, फार्मा कंपनियों के कर्मचारी (जो अभी चालू हैं) आदि जुटे हैं। इनकी संख्या हजारों में है। ये सभी खतरों के बीच सेवा में लगे हैं। सबसे ज्यादा इन्हें ही एहतियात बरतने को कहा गया है।

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