सालों से गृह युद्ध झेल रहे देश में कोरोना का पहला मामला, संयुक्त राष्ट्र ने कहा अब भारी तबाही होगी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

दुनियाभर में चीन से फैला कोरोना ने यमन में भी दस्तक दे दी है। यमन में सरकार के नियंत्रण वाले दक्षिणी प्रांत में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया है। कोविड-19 के लिए गठित शीर्ष राष्ट्रीय आपात समिति ने यह जानकारी दी है।

मामला सामने आने के बाद सहायता एजेंसियों ने चिंता ज़ाहिर की है। यमन सालों से गृह युद्ध झेल रहा है जिसके कारण वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद बुरी है।

समिति ने ट्वीट कर कहा है, ‘‘हैड्राम प्रांत में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया है। संक्रमित व्यक्ति की हालत स्थिर है और उसका उपचार किया जा रहा है।”

यमन में रहने वाले पहले ही हैज़ा, डेंगू और मलेरिया सहित कई बीमारियों से मुक़ाबला कर रहे हैं और सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि यहां के केवल आधे अस्पताल ही पूरी तरह काम करने की स्थिति में हैं।

समाचर एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, अधिकारियों ने उस बंदरगाह को तुरंत सील कर दिया है जहां ये शख़्स काम करते हैं. साथ ही उनके साथ काम करने वाले सभी कर्मचारियों को आइसोलेशन में जाने के लिए कह दिया गया है।

वहीं हद्रामउत के पड़ोसी प्रांतों, शबवा और अल महरा ने इससे जुड़ी अपनी सीमाओं को सील कर दिया है। हद्रामउत में 12 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र की ह्यूमैनेटेरियन को-ऑर्डिनेटर लिज़ा ग्रैंदे ने कहा है कि अगर यमन में वायरस ने अपने पैर पसारने शुरू किए तो यहां “भारी तबाही” होगी।

उन्होंने कहा, “कई सप्ताह से हम कोरोना को लेकर आशंकित थे और अब संक्रमण का मामला भी आया है। पाँच साल के युद्ध के बाद देश में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता न्यूनतम स्तर पर आ चुकी है और यहां रहने वाले वायरस संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वह यमन में चिकित्सा आपूर्ति सेवाएं मुहैया करा रहा है। संगठन का कहना है कि यहां टेस्ट किट, वेंटिलेटर दिए जा रहे हैं और साथ में स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का कहना था कि कुछ दानकर्ताओं ने अपनी सहायता इसलिए रोक दी थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि भेजी जाने वाली सहायता को हूती विद्रोही रोक रहे हैं।एजेंसी का कहना है कि अप्रैल के लगभग दो हफ़्ते बाद से परिवारों को हर महीने के बजाय अब दो महीने में एक बार ही सहायता मिल सकेगी।

अभी एक दिन पहले भारत ने शुक्रवार को सऊदी अरब समर्थित गठबंधन द्वारा यमन में संघर्ष विराम की एकपक्षीय घोषणा का स्वागत किया जिससे देश में पांच साल से चल रहा असैन्य संघर्ष समाप्त होने की उम्मीदें बढ़ गयी हैं। इस असैन्य संघर्ष में करीब एक लाख लोग मारे जा चुके हैं। 

पिछले महीने यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफिथ्स ने युद्धरत दलों से सैन्य कार्रवाई को रोकने और घातक कोरोना वायरस के प्रकोप का मुकाबला करने के प्रयासों को तेज करने का आग्रह किया था।

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