जि़ंदगी दांव पर लगाकर दुनिया को कोरोना मुक्त करेंगे ये योद्धा !

लंदन

ब्रिटेन में गुरुवार को पहली कोरोना वायरस वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल शुरू हो गया। इसमें 500 वॉलंटियर्स हिस्सा ले रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से यह ट्रायल कराया जा रहा है। सितंबर तक वैक्सीन ChAdOx1 nCoV-19 के तैयार हो जाने की उम्मीद है। लिहाजा पूरे विश्व की नजरें इस पर टिकी हुई हैं। इस दौरान सभी वॉलंटियर को अलग-अलग इंजेक्शन दिए जाएंगे, जो उन्हें अपने शरीर पर खुद ही लगाने होंगे।

वॉलंटियर्स को बेहद गंभीर साइड इफेक्ट का खतरा है, अगर ये संक्रमित हुए तो कोरोना और खतरनाक रूप ले सकता है। इन्हीं वॉलंटियर में से एक हैं 36 साल के जॉन ज्यूक्स। जो इस प्रोजेक्ट के मैनेजर भी हैं और ऑक्सफोर्डशायर के विटने शहर में रहते हैं। जॉन ऐसे वॉरियर हैं जो बाकी लोगों की जान बचाने के लिए खुद की जान को दांव पर लगा रहे हैं। एक इंजेक्शन जिसके बारे में ये पता ना हो कि वह शरीर पर कैसा असर डालेगा? क्या आप वैसा इंजेक्शन लगवाने को तैयार होंगे?

किसी ना किसी को तो हिम्‍मत दिखानी ही पड़ेगी। इंसानियत के लिए अपने शरीर को खतरे में डालना होगा। जॉन ऐसे ही वॉरियर हैं, जो कोरोना की वैक्सीन बन जाए, इसलिए ये इंजेक्शन लगवा रहे हैं। इन वॉलंटियर्स की बहादुरी को सलाम है क्योंकि ये वो खतरा मोल ले रहे हैं जिससे हमारी-आपकी सुरक्षा का रास्ता निकलेगा। मगर जॉन खुद को हीरो मानने को तैयार नहीं है। इनका कहना है, “मुझे तो लगता है कि ये बहुत सारे लोगों की मदद करने का बस एक मौका है।” जॉन की नम्रता देखिए। ये कहते हैं, “मुझे नहीं लगता जो मैं कर रहा हूं वो कोई हीरो जैसा काम है। मैं उस स्थिति में हूं जहां मैं बहुत सारे लोगों की मदद कर सकता हूं और ऐसा मौका चूकना नहीं चाहिए। कोरोना वायरस ने हमारी जिंदगी पर जैसा असर डाला है, उससे कोई बच नहीं सकता। अगर हर कोई वैक्सीन ढूंढने में मदद से कतराएगा तो शायद वैक्सीन मिल ही ना पाए।” जॉन को अपनी महिला पार्टनर से वैक्सीन के ट्रायल के बारे में पता चला। उनकी पार्टनर नर्स हैं।


कोई मुआवजा नहीं मिलेगा, फिर भी खतरा उठाने को तैयार

इन वॉलंटियर्स को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें अपना व‍क्त अलग से देना होगा। सोमवार को जॉन के शरीर में इंजेक्शन लगाया जाएगा। इसके बाद भी वह सामान्य जिंदगी जीते रहेंगे, मगर जोखिम तो है ही। इंजेक्शन लगने के बाद वह सीधे काम पर चले जाएंगे। जॉन को खतरे का अंदाजा है मगर वो डरते नहीं। इनका कहना है, “ट्रायल में रिस्क तो है मगर हर ऐसी चीज में खतरा तो होता ही है।” उनके मुताबिक, पूरी दुनिया के हालात सामान्य करने का यही सर्वश्रेष्ठ मौका है।

ट्रायल सफल हुआ तो और होगी टेस्टिंग

ब्रिटेन में पहले चरण के इस ट्रायल के बाद एक और अध्ययन होगा। उसमें वैक्सीन का 5000 वॉलंटियर्स पर टेस्ट किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वैक्सीन कोरोना वायरस का एक कमजोर रूप है जो चिम्पांजियों में सर्दी-जुकाम पैदा करता है। इंसानी कोशिकाओं में यह वो प्रोटीन बनाते हैं जो कोरोना वायरस के बाहरी सतह पर ‘कीलें’ बनाते हैं। अगर ट्रायल सफल रहा तो वॉलंटियर्स का इम्‍यून सिस्टम इन ‘स्पाइक प्रोटींस’ को पहचानने लगेगा। फिर ये प्रोटीन कोरोना वायरस से लड़ेंगे।

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