अमानवीयता- 20 हजार रु. में अंतिम संस्कार कराना है तो करो

संतोष शितोले | इंदौर

कोरोना महामारी के प्रकोप से शहर सहित दुनियाभर के लोगों में हाहाकार है। निजी अस्पतालों के डॉक्टर सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। इलाज के नाम मनमानी राशि वसूली जा रही है। अब तो मौत के बाद भी रुपए ऐंठे जा रहे हैं। हाल ही में एक व्यक्ति की मौत होने पर कोरोना के चलते साथ में कोई जाने को राजी नहीं हुआ तो परिवार के तीन लोग अस्पताल से शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। यहां पंडित ने अंतिम संस्कार कराने के नाम दो टूक कहा कि अगर कराना है 20 हजार रुपए लगेंगे।

मजबूरन महिला ने 20 हजार रु. देकर पति का अंतिम संस्कार कराया। मृत व्यक्ति रिटायर्ड सेल्स टैक्स कमिश्नर का बेटा था। मामला आशीर्वाद विला, निपानिया निवासी शिप्रा खरे का है। उनके पति मनीष खरे (47) शुगर व किडनी के मरीज थे तथा दो साल से बॉम्बे हॉस्पिटल में नियमित डायलिसिस चल रहा था। 9 अप्रैल को पत्नी उन्हें डायलिसिस कराकर घर लाई और अगले दिन उन्हें पैरालिसिस अटैक आया। इस पर उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और 12 अप्रैल की शाम उनकी मौत हो गई। इस पर उनके शव को वहीं मरच्युरी में रखवाया गया।

लोगों से गुहार की पर कोई नहीं आया- अगले दिन महिला, उनका बेटा अंशुमन (9) व भाई विशाल श्रीवास्तव ने प्रोटोकॉल के तहत शव सीधे अस्पताल से सयाजी होटल स्थित मुक्तिधाम के लिए तैयारी की। इस दौरान उन्होंने अपने आसपास के कई लोगों से चलने की गुहार की लेकिन कोरोना के चलते सभी ने मना कर दिया।

एक ही दिन में 20 हजार रु. में अंतिम संस्कार, अस्थि संचय और 13वां करा दो- आखिरकार दो परिचितों सहित पांचों लोग अस्पताल के वाहन से शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे। इस दौरान लॉक डाउन व कर्फ्यू के चलते उन्हें अंतिम संस्कार का न तो सामान मिला और न ही विधि विधान का तरीका मालूम था। इस दौरान उन्होंने वहां श्याम शर्मा नामक पंडित से अंतिम क्रिया की रस्म कराने को लेकर बात कही तो उन्होंने दो टूक कहा कि अभी कोरोना, लॉक डाउन व कर्फ्यू है। इसके चलते 20 हजार रु. लगेंगे। इसके लिए दाह संस्कार, अस्थि संचय, 13वां सहित सभी एक ही दिन में आज करना होगा।

…और ऐसे करना पड़ा अंतिम संस्कार

महिला ने असमर्थता जताई तो पंडित ने पहले तो मना कर दिया और कहा कि सामान भी मुझे ही लाना होगा इसलिए 17 हजार रु. से कम नहीं लगेंगे। मजबूरन महिला ने उनसे अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान पंडित ने एक शाल (करीब डेढ़ सौ रुपए), तीन-चार हार, आधा किलो घी और छुटमुट सामग्री लाई और तुरत-फुरत औपचारिक मंत्रोच्चार के साथ उनका अंतिम संस्कार किया और 17 हजार रुपए ऐंठ लिए जबकि नगर निगम द्वारा अंतिम संस्कार (लकड़ियों, कण्डों आदि के) की जो 3300 रु. की रसीद काटी जाती है, वह भी भरे।

अस्थि संचय के 5 हजार रु. मांगे- तीसरे दिन महिला ने अस्थि संचय को लेकर बात की तो पंडित ने उसके लिए 5 हजार रु. की मांग की। महिला द्वारा ज्यादा राशि की बात कहने पर पंडित ने 25 हजार रु. लेकर अस्थि संचय की रस्म कराई। इस तरह महिला से करीब 20 हजार रु. अंतिम संस्कार के ऐंठ लिए गए। महिला सहित अन्य लोगों का कहना है कि इन दिनों मुक्तिधाम पर ऐसे ही मनमानीपूर्वक राशि वसूली जा रही है।

पंडित ने कहा- लॉक डाउन, में सामान महंगा मिल रहा

इधर, पंडित श्याम शर्मा का कहना है कि सामान्यत: अंतिम संस्कार और अस्थि संचय के 4100 रु. विधि प्रक्रिया के लगते हैं। इसके अलावा सामान की कीमत अलग है। मुझे किसी मनीष खरे के परिवार से 20 हजार रु. लिए याद नहीं है। फिर भी दो पंडित साथियों के साथ तैयारी, सामान आदि अनुसार विधि विधान के 7-8 हजार रु. तो लगते ही हैं। लॉक डाउन में दुकान वाले भी ऊंची कीमत पर सामान दे रहे हैं इसलिए ज्यादा रुपए लिए जा रहे हैं।

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