अब क्रिकेट में ‘बॉल टैंपरिंग’ को किया जा सकता है वैध

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

कोविड-19 के कारण आने वाले वक्त में हर क्षेत्र में कुछ ना कुछ बदलाव होने की आशंका है इसमें से एक क्रिकेट भी है। अब इसमें भी कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

दरअसल संक्रमण की आशंका को देखते हुए लाल बॉल को चमकाने के लिए अब लार की जगह आर्टिफिशियल पदार्थ के इस्तेमाल को मंजूरी दी जा सकती है। क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया की निगरानी अंपायर करेगा। 

इसे दूसरे शब्दों में गेंद से छेड़खानी की इजाजत देना भी कह सकते हैं। आईसीसी के मौजूदा नियमों के मुताबिक, आर्टिफिशियल पदार्थ से गेंद चमकाना बॉल टेम्परिंग माना जाता है। यानी इस तरह से बॉल टेम्परिंग को अब आने वाले वक्त में वैध किया जा सकता है।

वैसे, अगर गेंद को चमक बनाए रखने के लिए कृत्रिम पदार्थ लगाने की इजाजत दी जाती है तो यह बड़ी विडंबना होगी। दो साल पहले गेंद पर रेगमाल रगड़ने की कोशिश में ही स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर को 2018 में एक साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा था और क्रिकेट जगत में उन्हें विलेन की तरह पेश किया गया था।

कोरोनावायरस के संक्रमण के खतरे को देखते हुए लार से गेंद चमकाने के मुद्दे को आईसीसी की मेडिकल कमेटी के प्रमुख पीटर हरकोर्ट ने बैठक में उठाया था। हरकोर्ट ने कहा, ‘‘हमारा अगला कदम इंटरनेशनल क्रिकेट को फिर से शुरू करने के लिए एक अच्छा रोडमैप तैयार करना है। इसमें उन सभी बदलावों को शामिल किया जाएगा, जो क्रिकेट और खिलाड़ियों के लिए जरूरी हैं।’’

भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने गेंद पर थूक का इस्तेमाल नहीं करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था, ‘खेल बहाल होने पर कुछ समय के लिये सिर्फ पसीने का ही इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

वहीं साउथ अफ्रीका की वनडे टीम के कप्तान क्विंटन डी कॉक ने इस पर कहा कि हम फिर भी गेंद को चमकाएंगे, हमारी टीम के डॉक्टर और प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे कि हमें कोरोनवायरस नहीं है। ऑस्ट्रेलिया के तेजी गेंदबाज पैट कमिंस ने इस पर कहा, एक गेंदबाज के रूप में मुझे लगता है कि अगर हम टेस्ट के दौरान गेंद को चमका नहीं पाते तो खेलना काफी कठिन होगा।

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