कोरोना के खौफ से अपराध घटे, दशकों का रिकॉर्ड टूटा, अपराधों में 98% गिरावट

संजय त्रिपाठी | इंदौर

एनसीआरबी के आंकड़े व संस्था पौरुष के सर्वे से खुलासा: सालों बाद चोरी, लूट, डकैती, चेन स्नेचिंग जैसी वारदातों से पुलिस को राहत

अपराधों के मामले में मिनी मुंबई कहलाने वाले इंदौर ही नहीं बल्कि प्रदेश ने पिछले 30 दिनों में दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह रिकॉर्ड कोरोना के कारण अपराधों में आई बड़ी गिरावट का है। सालों तक अपराधियों ने आमजन ही नहीं बल्कि पुलिस की नाक में दम कर रखा था। अब स्थिति यह कि अपराधियों को पुलिस का नहीं बल्कि कोरोना, लॉक डाउन व कर्फ्यू का खौफ है। इसके चलते संगीन अपराधों में 88 से 98 फीसदी तक गिरावट आई है। हालांकि आमजन तो लॉक डाउन में घरों में कैद हैं जबकि पुलिस को अपराधों के मामले में राहत है।

कोरोना महामारी पर नियंत्रण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, पुलिस एवं प्रशासन हर संभव कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह खबर अत्यन्त सुकून देने वाली है कि देशभर में कोरोना काल में विभिन्न अपराधों का ग्राफ 88 प्रतिशत से लेकर 99 प्रतिशत तक गिर चुका है। महिला अपराधों के मामलों में कमी आने का कारण मौत के भय से अपराधियों के हौंसले पस्त हो जाना है। पुरूष अधिकारों के लिए कार्यरत संस्था पौरुष द्वारा पिछले 30 दिनों के किए गए ऑन लाइन टेलिफोनिक सर्वे तथा नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की आंकड़ों से यह बात खुलकर सामने आई है कि महिला अपराधों का ग्राफ पिछले कई दशकों में सबसे कम पाया गया है। संस्था पौरूष के अध्यक्ष अशोक दशोरा ने बताया कि कोरोना काल के दौरान सख्ती एवं बंद के चलते महिला एवं बाल अपराधों का ग्राफ निम्नतम स्थिति में है। 22 मार्च से वर्तमान 22 अप्रैल तक एक माह के आंकड़ों को देखे तो देशभर में दुष्कर्म के मामलों में 88 प्रतिशत की कमी, छेडछाड़ में 93 प्रतिशत, अपहरण में 95 प्रतिशत, यौन उत्पीडन में 97 प्रतिशत, दहेज में 98 प्रतिशत एवं घरेलू हिंसा में 99 प्रतिशत की कमी आई है। बाल अपराधों में भी 96 प्रतिशत कमी हुई है।

पहले दुष्कर्म के 47 केस, अब एक

• मप्र में 22 मार्च से 22 अप्रैल के मध्य दुष्कर्म के 2 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि पिछले साल इसी अवधि में कुल 139 केस दर्ज किए गए थे। वहीं अगर इंदौर की बात करें तो 22 मार्च से 22 अप्रैल के बीच मात्र एक दुष्कर्म का केस लसूडिया थाने में दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल इस अवधि में इंदौर में 47 केस दर्ज हुए थे। इसी तरह दिल्ली में दुष्कर्म के सिर्फ 13 केस सामने आए है जबकि पिछले साल इसी अवधि में 156 मामले दर्ज हुए थे।

• मप्र में इस अवधि में दहेज संबंधी 9 केस दर्ज किए गए जबकि पिछले साल इसी
अवधि में 217 केस दर्ज किए गए। इंदौर में इस अवधि में मात्र दो केस (द्वारकापुरी व दूसरा बाणगंगा) में दर्ज किए गए। पिछले 76 केस दर्ज किए गए थे। घरेलू हिंसा में देशभर में सर्वाधिक कमी आई है। इस तरह के मामले लगभग शून्य हो गए है।

• पिछले साल 3162 केस दर्ज किए थे। मप्र में पिछले साल 823 दर्ज किए थे। इंदौर में बीते 30 दिनों में जरूर 12 केस आए हैं जबकि पिछले साल इस अवधि में 118 केस दर्ज थे।

ये संगीन अपराध भी बिल्कुल थमे

चोरी, लूट, अपहरण, हमले, चेन स्नेचिंग व शराब तस्करी के मामले में इंदौर की स्थिति कुछ इसी तरह हैं। पिछले साल इस अवधि में चोरी के 69 लूट के 27, अपहरण के 17, चेन स्नेचिंग के 13 एवं शराब तस्करी के 21 केस दर्ज किए गए थे। इसी तरह अन्य अपराधों के 147 मामले थे। वर्तमान में इस तरह के 23 केस ही सामने आए हैं।

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