जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल पर रार, भाजपा छोड़ सबका विरोध

श्रीनगर

कोरोना से जंग के बीच डोमिसाइल को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासत तेज हो गई है। नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, पीडीपी, अपनी पार्टी, पैंथर्स पार्टी सहित अन्य कश्मीरी दलों ने इसका विरोध किया है। वहीं भाजपा ने डोमिसाइल को राज्य हित में बताया। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि डोमिसाइल हम लोगों के जख्मों पर नमक छिड़का है।

उमर ने ट्वीटर पर लिखा कि मौजूदा समय में पूरा मुल्क कोरोना के खिलाफ लड़ रहा है। सभी संसाधन इसके खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे समय में केंद्र ने जम्मू कश्मीर के लिए डोमिसाइल कानून बनाया है। यह कहीं भी हमारे संरक्षण के वादे को पूरा नहीं करता। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की तरफ से उनकी बेटी इल्तिजा ने ट्विटर पर लिखा कि नया डोमिसाइल कानून तो अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ शुरू हुए जनसांख्यिकी परिवर्तन योजना का हिस्सा है। ऐसे नाजुक मौके पर कानून को लागू करना केंद्र की कश्मीर के प्रति पक्षपातपूर्ण मानिसकता को दर्शाता है। ऐसी जल्दबाजी बंद हजारों कश्मीरियों की जान बचाने में क्यों नहीं दिखाई जाती। मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद युसुफ तारीगामी ने कहा कि यह कानून जम्मू-कश्मीर जनता के साथ भाजपा नेतृत्व का एक और धोखा है। इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों में जो डर व आशंकाएं हैं, वही मजबूत हुई है।

पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्षदेव सिंह ने कहा कि डोमिसाइल स्थानीय युवाओं के अधिकारों के साथ धोखा है। डोमिसाइल में चतुर्थ श्रेणी के कुछ पद स्थानीय युवाओं के लिए होंगे और अन्य सभी पदों के लिए बाहरी राज्यों के युवा आवेदन कर सकेंगे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान जीए मीर ने कहा कि डोमिसाइल के प्रावधान से जम्मू कश्मीर के स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर में प्राइवेट क्षेत्र में नौकरियों के अवसर बहुत कम है। अब प्रावधानों के तहत जम्मू कश्मीर में नौकरियों का अधिकतर हिस्सा बाहरी राज्यों में चला जाएगा। उन्होंने सात उत्तर पूर्वी राज्यों की तर्ज पर जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने की मांग की है।

अदालत में जा सकते हैं बुखारी

जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग जब जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे हैं, पूरे देश में लाकडाउन है और केद्र ने यह आदेश जारी कर दिया। इसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों और आकांक्षाओं का ध्यान नहीं रखा गया है। इस कानून ने जम्मू कश्मीर के उन लोगों को पूरी तरह निराश किया है जो 31 अक्टूबर 2019 के बाद यह मानकर चल रहे थे कि नौकरी, जमीन व अन्य मुद्दों पर उनके हितों को पहले की तरह संरक्षित रखा जाएगा। यह आदेश है संसद द्वारा बनाया कानून नहीं है। इसके खिलाफ अदालत में जाया जा सकता है।

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