रॉ की पूर्व अधिकारी ने लगाया था यौन शोषण का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने कहा 1 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।  

सुप्रीम कोर्ट ने देश की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की पूर्व महिला कर्मचारी की एक शिकायत को गंभीरता से ना लेने पर केंद्र को निर्देश दिया है कि उसे 1 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि रॉ ने उस वक्त चीफ और उनके डिप्टी के खिलाफ की गई यौन शोषण की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिला के मौलिक अधिकारों का हनन माना है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारी की ओर से उसके कंपल्सरी रिटायरमेंट के खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा अपने आदेश में

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यौन उत्पीड़न की शिकायत का सही तरीके से निस्तारण नहीं किए जाने के कारण महिला अधिकारी को काफी अमर्यादित हालातों से गुजरना पड़ा। पीठ ने कहा कि महिला अधिकारी की शिकायत पर जांच का नतीजा चाहे कुछ भी निकला हो, लेकिन उसके मौलिक अधिकारों का सही मायने में उल्लंघन हुआ है। लिहाजा महिला अधिकारी मुआवजे की हकदार है।

पीठ ने कहा कि मुआवजे की यह धनराशि आज से अगले छह सप्ताह के भीतर या तो याचिकाकर्ता को सीधे तौर पर दी जाए या सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री कार्यालय में जमा कराई जाए।

महिला को कम्पलसरी रिटायरमेंट दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने 2009 में पीड़िता को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए जाने के सरकार के फैसले को सही ठहराया। एजेंसी का कहना था कि 2008 में आत्महत्या का प्रयास करने की वजह से वह मीडिया सुर्खियों में आ गई थीं, जिससे उनकी गोपनीयता समाप्त हो गई थी।

पीठ ने निशा प्रिया भाटिया को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने के निर्णय को सही ठहराते हुये अपने फैसले में 1975 के नियमों के नियम 135 को वैध करार देते हैं और कहते हैं कि इसमें किसी प्रकार की असंवैधानिकता नहीं हैं। पीठ ने नियम 135 के तमाम बिन्दुओं पर विस्तार से विचार किया और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत अपनायी जाने वाली प्रक्रिया अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामले में लागू नहीं की जा सकती।

आखिर क्या था ये मामला

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, अगस्त 2007 में रॉ की एक महिला अधिकारी ने सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकायत की. महिला 1988 में रॉ में शामिल हुई थीं। अपनी शिकायत में उन्होंने रॉ के तत्कालीन सेक्रेटरी अशोक चतुर्वेदी और ज्वॉइंट सेक्रेटरी सुनील उके पर आरोप लगाया कि चतुर्वेदी और उके ने महिला से कहा कि जल्दी प्रमोशन के लिए वह संगठन के अंदर चल रहे ‘सेक्स रैकेट’ में शामिल हो जाए लेकिन महिला ने इससे इनकार किया। इसके बाद उसे परेशानियां झेलनी पड़ीं। शिकायत के बाद रॉ की ओर से आरोपों की जांच के लिए करीब तीन महीने बाद जांच कमिटी बनाई गई।

जांच कमिटी ने सुनील उके पर लगाए आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायत करने वाली महिला ने अगस्त 2008 में प्रधानमंत्री के दफ्तर के पास में सुसाइड का प्रयास किया। ऐसे में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने एक और जांच कमिटी बनाई। जांच का जिम्मा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी रथि विनय झा को दिया गया। इस कमिटी ने भी फैसला शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ दिया। आरोपी अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई।

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