कोरोना से करीब आए स्कॉटलैंड के सबसे बड़े परिवार के 13 सदस्य

एडिनबर्ग

कोरोना महामारी के बीच ये कहानी है स्कॉटलैंड के सबसे बड़े परिवार की। रॉय और एमा हान में से रॉय कोरोना पॉजिटिव हैं। इनके परिवार में कुल 13 बच्चे हैं। हान परिवार फिलहाल 14 दिनों के लिए अपने घर पर ही क्वारंटाइन है और रॉय सात दिनों के लिए आइसोलेशन में हैं। ये परिवार अपने हौसले से कोरोना का जिस तरह से सामना कर रहा है, वह दूसरों के लिए एक सबक हो सकता है। दुनिया के बाकी देशों की तरह स्कॉटलैंड में भी लॉकडाउन लागू है। ऐसे में रॉय और एमा ने घर के भीतर नियम से रहने के लिए बच्चों के लिए एक रूटीन तय किया है। इतना ही नहीं इस महामारी ने परिवार के सभी बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी कराया है।

रॉय हान नाइनवेल्स अस्पताल में नर्स प्रैक्टिशनर का काम करते हैं और महामारी के दौर में अपने बड़े परिवार को संक्रमण के खतरे से बचाना इनके लिए बड़ी चुनौती है। मुश्किल तब शुरू हुई जबकि हाल ही में रॉय का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। रॉय कहते हैं, “मुझमें संक्रमण के लक्षण दिखना शुरू ही हुए थे और मामूली थे, जब टेस्ट पॉज़िटिव आया तो मुझे काफी आश्चर्य हुआ।” 50 साल के रॉय को टाइप-2 डयबिटीज़ है। हालांकि वो कहते हैं कि उम्मीद है कि वो जल्द ठीक होकर एक बार फिर कोरोना से मुक़ाबले के लिए तैयार हो जाएंगे। रॉय अब पूरा वक्त घर पर ही गुज़ार रहे हैं जिससे उनकी पत्नी एमा को भी काफी मदद मिल रही है। एमा एक कैफ़े चलाती हैं जो अभी बंद है।

रॉय कहते हैं, “मेरी ज़िंदगी में बहुत कुछ नहीं बदला है, बस इतना कि अब मैं अपने बच्चों को ज्यादा वक्त देखता हूं। बच्चों की उम्र पांच साल से लेकर 28 साल के बीच है। एक दिन के खाने के लिए परिवार को क़रीब 28 लीटर दूध, 21 ब्रेड की ज़रूरत होती है। एमा कहती हैं, “अब हम दुकान में एक बार में एक चीज़ के तीन ही पैकेट ख़रीद सकते हैं। ऐसे में हमें बार-बार दुकान जाना पड़ा रहा है और हमारे लिए संक्रमण का ख़तरा भी कई गुना बढ़ रहा है। लेकिन हम मिलजुलकर इससे निपट रहे हैं।” एमा कहती हैं, “घर के सभी सदस्य एक-दूसरे की अधिक मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार एकजुट होकर महामारी से लड़ने की कोशिश कर रहा है।”

काम के तरीके में बदलाव कर दूर कर रहे तनाव

हान परिवार रात को अपने गार्डन में बास्केटबॉल खेलता है। ये कोई बड़ा काम नहीं है, लेकिन अब ये परिवार अलग रूप में इसकी अहमियत समझ रहा है। ऐमा कहती हैं, “हमारा नसीब अच्छा है कि हमारे घर में एक गार्डन है, अगर हमारे सामने ऐसी स्थिति होती कि हमें पांच बच्चों के साथ एक फ्लैट में रहना होता तो कितना मुश्किल होता? जब लॉकडाउन शुरु हुआ मुझे लगा कि मुझ पर ज़िम्मेदारियों का दवाब बढ़ जाएगा, ये बेहद मुश्किल भरा वक्त है, लेकिन हकीक़त में ज़िंदगी वैसे नहीं चलती जैसा आप सोचते हैं। मेरा 14 साल का बेटा अक्सर रात में अपने एक्स-बॉक्स के साथ खेलता रहता है। मेरी बेटी सवेरे छह बजे उठ जाती है और घर से दफ्तर का काम करती है। मुझे पहले तो ये अच्छा नहीं लगा, लेकिन शिफ्ट में लोगों के लिए खाना बनाना आसान है। काम के तरीके में बदलाव करना अच्छा होता है क्योंकि यही एक चीज़ है जो हम कर सकते हैं।”

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