नांदेड़ से पंजाब लौटे सिख श्रद्धालुओं का मामला तबलीगी जैसा हुआ, 170 से ज्यादा पॉजिटिव

संतोष शितोले/नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित श्री हजूर साहिब गुरुद्वारे में फंसे पंजाब के सिख श्रद्धालु लगातार बसों के जरिए पंजाब वापस लाए जा रहे हैं। लेकिन अब यही लोग पंजाब सहित भारत के लिए खतरा बताये जा रहे हैं क्योंकि इनमें से अधिकांश लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

आखिर क्यों जोड़ा जा रहा तबलीगी जमात से

दरअसल 3500 से ज़्यादा सिख श्रद्धालु कोरोना वायरस के बाद लागू लॉकडाउन के कारण महाराष्ट्र के तख़्त हुज़ूर साहिब में फंस गए थे। तमाम कोशिशों के बाद पंजाब सरकार को इनको वापस लाने में एक महीना लगा। पंजाब से 90 बसें श्रद्धालुओं को लाने के लिए भेजी गईं थी। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को क्वारंटाइन करके कोविड सैम्प्लिंग करने के आदेश जारी किए गए लेकिन अब बढ़ते केस देखकर सरकार के होश उड़े हुए हैं।

यही लोग अब पंजाब के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। पंजाब के 4,000 से अधिक तीर्थयात्री मार्च से नांदेड़ में फंसे हुए थे। U3500 से ज्यादा श्रद्धालु पंजाब लौटे हैं। नांदेड़ से लौटे 170 से ज्यादा श्रद्धालु अब तक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। अब पंजाब में कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने नांदेड़ से आने वाले हर शख्स का कोरोना टेस्ट कराने का फैसला किया है। इसके अलावा बाहर से आने वाले लोगों को 21 दिन के लिए सरकारी क्वारंटीन में रहना होगा।

अकाल तख्त के प्रमुख ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने गुरुवार को चिंता व्यक्त की कि तीर्थयात्रियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि सिख तीर्थयात्रियों को भी तबलीगी जमात की तरह अपमानित किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि पूरे समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।”

अभी तक सेवादारों की जांच नहीं हुई

वहीं हमारे रिपोर्टर संतोष शितोले के मुताबिक जब पिछले हफ्ते पंजाब सरकार के आह्वान पर नांदेड गए 4 हजार सिख अनुयायी वहां से 125 बसों से सवार होकर इंदौर आकर पंजाब चले गए। अलग-अलग अवधि में ये बसें सिमरोल में रुकी और स्थानीय सेवादारों ने उनकी सेवाएं की। ये जत्थे जब पंजाब पहुंचे तो उनमें से 31 पॉजिटिव निकले जिसके चलते पंजाब में दो हफ्ते का लॉक डाउन बढ़ा दिया गया। विडम्बना यह कि यहां स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी ही नहीं है और इस कारण उन अनुयायियों के संपर्क में रहे सेवादारों को अब तक क्वारेंटाइन नहीं किया गया है।

अब ध्यान देने वाली बात ये भी है कि ये बसें यदि इंदौर के अलावा और भी कहीं रुकी होंगी तो वहां सेवा देने वालों से लेकर जिसके भी संपर्क में ये श्रद्धालु आये हैं उनकी तत्काल जांच की जानी चाहिए।

संतोष शितोले ने इस मामले में आगे बताया है कि इस लंबे सफर के दौरान ये 125 बसें पिछले हफ्ते चार दिन तक इंदौर होकर गुजरी। इस दौरान इन बसों में सवार जत्थों ने सिमरोल स्थित घाट के पास कुछ समय विश्राम किया। इन अनुयायियों की सेवा के लिए खालसा बाग गुरुद्वारा (चोइथराम हॉस्पिटल के पास) से जुडे करीब 20 सेवादारों ने इनकी सेवा की। इन लोगों ने सभी 4 हजार लोगों को चाय, पानी व भोजन का इंतजाम किया। इसके साथ ही भोजन के पैकेटों की भी व्यवस्था की।

सेवादारों को लेकर क्या कहता है प्रशासन

गुरुसिंघ सिख सभा के अध्यक्ष जसबीरसिंह गांधी का कहना है, “मुझे इस बात की जानकारी नहीं है। मैं खुद ही लॉक डाउन शुरू होने के दौरान से ही घर में हूं। अगर ऐसा है को खालसा बाग गुरुद्वारा से या जो भी सेवादार हैं, उनकी जानकारी लेकर क्वारेंटाइन किया जाना चाहिए।”

इस मामले में ना तो प्रशासन को भनक है ना वहां के आला अधिकारियों को। सिमरोल के आईपीएस ने खुद कबूल किया उनको ये तक नहीं पता है कि इस सेवा कार्य में कौन और कितने लोग थे।

आईपीएस सृष्टि भार्गव ने कहा, “80 बसें नांदेड़ से इंदौर होकर पंजाब गई थी। इनमें से एक-दो बसें सिमरोल थाना क्षेत्र के कुछ बाहर की ओर रुकी थी। किन सेवादारों ने उनकी सेवा की या संपर्क में रहे, मेरी जानकारी में नहीं है। हालांकि बाद में पता चला कि पंजाब में जो पॉजिटिव निकले हैं, ये इन्हीं बसों के थे या कोई और, इसका पता नहीं है।”

अब क्या एक्शन लिया पंजाब सरकार ने

कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला किया है। राज्य में लॉकडाउन 2 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया गया है। लॉकडाउन का दूसरा चरण 3 मई को खत्म होना है, लेकिन पंजाब में ये अगले दो हफ्ते और लागू रहेगा।

पंजाब में कोरोना वायरस के मामलों में 33.7 फीसदी बढ़ोतरी पाई गई है। प्रदेश में एक दिन में सबसे ज्यादा 167 मामले सामने आए जिसके बाद यहां मरीजों की संख्या 542 पर पहुंच गई।

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