सिख डॉक्टरों की दाढ़ी से संक्रमण का खतरा, इसलिए ड्यूटी से हटाया

लंदन

ब्रिटेन में सिख डॉक्टरों को कोरोना वायरस के रिस्क जोन वाली कैटेगरी में डाला गया, विरोध शुरू

ब्रिटेन में नेशनल हेल्थ सर्विस में काम करने वाले कुछ सिख डॉक्टर विरोध कर रहे हैं। ब्रिटेन में कोरोना वायरस की महामारी फैलने के वक्त से ये सिख डॉक्टर मरीजों की सेवा में आगे रहे हैं, लेकिन अब इन्हें कोरोना वायरस के वार्ड में ड्यूटी नहीं दी जा रही है, इसकी वजह से डॉक्टरों ने विरोध करना शुरू कर दिया है।

सिख डॉक्टरों को उनकी दाढ़ी की वजह से कोरोना वायरस के वार्ड में उनकी ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है। ब्रिटेन के सिख डॉक्टर्स एसोसिएशन ने जानकारी दी है कि करीब 5 डॉक्टरों को उनकी दाढ़ी की वजह से कोरोना वायरस के वार्ड में ड्यूटी करने से रोका गया है। सिख डॉक्टरों को उनकी दाढ़ी की वजह से ऐसे वार्ड में काम करने के लिए फिट नहीं माना जा रहा है। सिख डॉक्टरों को ब्रिटेन में कोरोना वायरस के रिस्क जोन वाली कैटेगरी में डाल दिया गया है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि सिख डॉक्टरों की दाढ़ी की वजह से फेस मास्क उनके चेहरे पर फिट नहीं होते और उन्हें वायरस संक्रमण का खतरा बना रहता है। दाढ़ी जैसी चीजों पर वायरस के ज्यादा देर तक जिंदा रहने की रिपोर्ट्स भी आ चुकी हैं।

ब्रिटेन में कोरोना वायरस का इलाज करने वाले हेल्थ केयर वर्कर्स को सरकारी गाइडलाइन फॉलो करनी पड़ती है। उन्हें पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट और फेस मास्क लगाना जरूरी है। हालांकि इस बारे में कोई गाइडलाइन नहीं है कि हेल्थ वर्कर्स को दाढ़ी बनाकर आना जरूरी है, लेकिन एनएचएस के हेल्थ वर्कर्स को ये समझाया गया है कि दाढ़ी के बाल संक्रमण के लिहाज से क्यों खतरनाक हैं।

धार्मिक मान्यताओं के चलते सिख डॉक्टर नहीं बनवा सकते दाढ़ी

एनएचएस के वर्कर्स के लिए वेबसाइट में लिखा गया है कि दाढ़ी की वजह से पीपीई और फेस मास्क पहनने में समस्या आना एक आम बात है। दाढ़ी की वजह से फेस मास्क चेहरे को ठीक से कवर नहीं कर पाता। ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहता है। अगर स्टाफ दाढ़ी नहीं बनाते हैं तो उन्हें दूसरी तरह की मेडिकल शिफ्ट दी जाती है। उन्हें नॉन क्लीनिकल एरिया में काम मिल सकता है, लेकिन मरीजों के वार्ड से उन्हें दूर रखा जाता है। सिख डॉक्टरों की समस्या पर वेबसाइट में लिखा गया है कि कुछ सिख डॉक्टरों ने अपनी समस्या के बारे में जानकारी दी है। वो अपनी धार्मिक मान्यताओं की वजह से दाढ़ी नहीं बनवा सकते। उनके लिए अलग तरह से पीपीई और फेस मास्क उपलब्ध करवाने पर विचार चल रहा है। इसी तरह की समस्या दाढ़ी रखने वाले मुसलमान डॉक्टरों को भी सामना करना पड़ रहा है।

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