पैदल 450 किमी का सफर, घर से 70 किमी पहले सड़क किनारे जन्मी कोरोना कुमारी

विनोद शर्मा | इंदौर

सात महीने पहले रोटी-रोजगार के लिए पति संग ललितपुर से इंदौर आई थी राजाबेटी, लॉकडाउन के कारण बेगार होकर लौटना पड़ा घर

रोजी-रोटी छिन जाने की कसक और कोरोना वायरस से जिंदगी बचाने की फिक्र पाले इंदौर से रुखसत हुई ललितपुर की राजाबेटी ने 45 किलोमीटर का सफर पैदल तय करने के बाद अपने घर से 70 किमी पहले सड़क किनारे खेत में एक बेटी को जन्म दिया। नाम रखा कोरोना कुमारी। ग्रामीणों ने एम्बुलेंस की व्यवस्था कर मां-बेटी को उनके गांव बरखिरिया (ललितपुर) रवाना कर दिया। वहीं पति व अन्य लोगों को जिला मुख्यालय स्थित क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया, ताकि नवजात को संक्रमण का खतरा न रहे।

महामारी और बेगारी के चलते मजदूरों के पलायन की खबरों के बीच सोमवार को एक अच्छी खबर आई मप्र और उप्र की सीमा से सटे गांव बालाबेहट (ललितपुर) से। यहां इंदौर से ललितपुर के लिए निकले 25-26 मजदूर थकान के कारण विश्राम कर रहे थे। इसी बीच तीन साल की बेटी और नौ महीने के गर्भ के साथ 5 मई से लगातार पैदल चलती रही बरखिरिया गांव की बहू राजाबेटी को प्रसव पीड़ा हुई। दल में शामिल महिलाएं उसे सड़क से लगे खेत में ले गईं, जहां उसने बेटी को जन्म दिया और बच्ची की किलकारी ने थकान आधी कर दी। खेत मालिक की सूचना पर प्रधान रचनादेवी पति व अन्य सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचीं। प्रारंभिक उपचार देने के बाद एम्बुलेंस को सूचना दी गई। महिला और बच्ची की स्क्रीनिंग व जांच करके उन्हें 70 किलोमीटर दूर स्थित उनके गांव भेज दिया गया। चूंकि बीते सप्ताह इंदौर से भागकर आया युवक कोरोना पॉजिटिव निकला था, इसीलिए एहतियात के तौर पर राजाबेटी के पति पुनुआ व अन्य को जांच के लिए क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया।

बेहद गरीब है राजाबेटी का परिवार

पुनुआ और राजाबेटी बेहद गरीब हैं। 2019-20 में स्वच्छता मिशन के तहत पंचायत ने शौचालय बनाया था। घर कच्चा है। परिवार में अन्य लोग भी हैं। आय बढ़ाने के लिए पति-पत्नी इंदौर आ गए थे। यहां छह-सात महीने ही काम कर पाए और महामारी के कारण उपजी बेगारी की स्थिति में वापसी करना पड़ी। इंदौर से ललितपुर के बीच की दूरी 450 किलोमीटर है, जो पति-पत्नी और उनके साथियों ने पैदल तय की।

जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

सड़क किनारे खेत में ‘कोरोना’ का जन्म हुआ। मां-बेटी की प्रारंभिक जांच करवाई। दोनों स्वस्थ्य थीं। मां बहुत थक चुकी थी, इसलिए उनकी समस्या देखते हुए एम्बुलेंस से रवाना किया गया।
-रचनादेवी, प्रधान

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