गुजरात सीएम को हटाने की आशंका पर खबर चलाई अब संपादक पर राजद्रोह का केस

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

गुजरात में मुख्यमंत्री को बदलने की खबर छापने पर एक समाचार पोर्टल के संपादक के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। जो हुआ ठीक नहीं हुआ है। इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर असर पड़ा है।

अब इस पर बवाल मचा हुआ है। जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा- ”किसी भी चीज के लिए राजद्रोह! कोई नियम कानून नहीं।”

एक समाचार ने गुजरात के सीएम का माथा ठनका दिया

संवाददाता के अनुसार, ‘फेस ऑफ नेशन’ के मालिक और संपादक धवल पटेल ने कथित तौर पर 7 मई को एक समाचार लिखा। जिसका शीर्षक था- ‘मनसुख मांडविया को हाई कमांड का बुलावा, गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना’। 

बीजेपी आलाकमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की जगह पर केंद्रीय मंत्री मंसुख मंडाविया को मुख्यमंत्री बना सकता है। मंडाविया केंद्रीय मंत्री और गुजरात से राज्यसभा सांसद है। खबर में उल्लेख किया गया है कि गुजरात में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री की ‘विफलता’ का नई दिल्ली ने संज्ञान लिया है।

पीटीआई के मुताबिक, सहायक पुलिस आयुक्त बीवी गोहिल ने बताया है कि कोरोना वायरस की वजह से पटेल को गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि हिरासत में लिया गया है और उन्हें कोरोना वायरस की जांच के लिए एसवीपी अस्पताल भेजा गया है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस दर्ज

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को लोकल वेब पोर्टल ‘फेस ऑफ नेशन’ के एडिटर धवल पटेल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (राजद्रोह) और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। पटेल ने 7 मई को अपने समाचार पोर्टल पर एक खबर प्रकाशित की जिसमें दावा किया गया कि रूपानी के कोरोना वायरस संकट से निपटने के तरीके से आलाकमान खुश नहीं है।

हार्दिक पटेल के साथ बाकी नेता भी संपादक के पक्ष में

हालांकि, पत्रकार के खिलाफ भाजपा सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की कांग्रेस के दिग्गज नेता हार्दिक पटेल और शक्तिसिंह गोहिल ने कड़ी आलोचना की है और शक्तिसिंह ने तो सवाल उठाया है कि, अगर भाजपा सरकार के नेतृत्व की आलोचना अपराध है तो भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के खिलाफ केस क्यों नहीं दर्ज किया जा रहा है? इसके लिए उन्होंने स्वामी के ट्वीट का हवाला दिया है। जिसमें उन्होंने गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन को जरूरी बताया था।

हार्दिक ने ट्वीट कर कहा है कि, “गुजरात सरकार ने स्वतंत्र न्यूज़ वेब पोर्टल चलाने वाले धवल पटेल पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया हैं। सच बोलने वाले व्यक्ति पर राजद्रोह जैसे गम्भीर मुक़दमे दर्ज कर सरकार आम लोगों को डरा रही हैं। न्यूज़ चैनल सरकार के कंट्रोल में रहे तो मालामाल नहीं तो जेल। लेकिन हम डरेंगे नहीं।”

पूर्व मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता शंकरसिंह वाघेला ने भी मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि संपादक द्वारा समाचार प्रकाशित करने से मुख्यमंत्री बदल नहीं जाएंगे। पत्रकार लोगों तक समाचार पहुंचाने का काम करते है। उनके ऊपर क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई करना सही नही है। अगर किसी भी समाचार में कोई गलती हो तो राज्य सरकार को उसकी स्पष्टता करनी चाहिए। 


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