लॉकडाउन में जिंदगी की रेस से बेहाल भारतीय एथलीट

नई दिल्ली

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के कारण नागपुर की एक एथलीट को ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। नागपुर की धाविका प्राजक्ता गोडबोले को लॉकडाउन के चलते भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनकी मां अब बेरोजगार हो गई है और उनके पिता पहले से ही लकवाग्रस्त हैं। प्राजक्ता के पास एक वक्त का खाना खाने तक के पैसे भी नहीं हैं। अगर किसी तरह एक वक्त का खाना मिल भी जाता है तो उन्हें नहीं पता कि अगले वक्त का खाना मिलेगा भी या नहीं। 24 साल की प्राजक्ता नागपुर में सिरासपेठ झुग्गी में अपने माता-पिता के साथ रहती हैं। उन्होंने 2019 में इटली में विश्व विश्वविद्यालय खेलों की 5000 मीटर रेस में भारतीय विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया था, जिसमें उन्होंने 18:23.92 का समय निकाला था। हालांकि वह फाइनल दौर के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं। इस साल के शुरू में हुई टाटा स्टील भुवनेश्वर हाफ मैराथन में 1:33:05 के समय से प्राजक्ता दूसरे स्थान पर रही थीं।

प्राजक्ता के पिता विलास गोडबोले पहले सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम करते थे, लेकिन वह एक दुर्घटना के बाद लकवाग्रस्त हो गए। प्राजक्ता की मां अरुणा रसोइये के तौर पर काम करके 5000 से 6000 रुपए महीना कमाती थीं जो उनके घर को चलाने का एकमात्र साधन था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से शादियां नहीं हो रहीं तो इस परिवार को दो जून का खाना जुटाने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राजक्ता का कहना है, ‘‘हम पास के लोगों की मदद पर ही निर्भर हैं। लोग हमें चावल, दाल और अन्य चीजें दे जाते हैं। इसलिये हमारे पास अगले दो-तीन दिन के लिए खाने को कुछ होता है, लेकिन नहीं पता कि आगे क्या होगा। हमारे लिए यह लॉकडाउन काफी क्रूरता भरा साबित हो रहा है।’’

हम केवल प्रार्थना कर सकते हैं

प्राजक्ता ने कहा, ‘‘मैं ट्रेनिंग के बारे में नहीं सोच रही हूं क्योंकि मैं नहीं जानती कि इन हालात में मैं कैसे जीवित रहूंगी। हमारे लिए जीवन बहुत कठिन है। इस लॉकडाउन ने हमें बर्बाद कर दिया है। ’’ उनका कहना है कि वह नहीं जानती कि इन हालात में क्या करें और किससे मदद की गुहार करे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानती कि क्या करूं, मेरे माता-पिता कुछ नहीं कर सकते। हम केवल प्रार्थना ही कर सकते हैं कि यह लॉकडाउन खत्म हो जाए। हम बस इसका इंतजार कर रहे हैं।’’उन्होंने कहा कि उन्होंने जिले या राज्य स्तर पर किसी एथलेटिक अधिकारी से अब तक मदद नहीं मांगी है।

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