चीन की गतिविधियों का खंडन करते हुए व्हाइट हाउस एक बार फिर आया भारत के साथ

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

भारत के अपने क्षेत्र में चीन की दखलअंदाजी का कड़ा विरोध किए जाने के कदम का अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक द्वारा समर्थन करने के एक दिन बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन भारत समेत अपने पड़ोसी देशों के साथ उकसावे वाली और बलपूर्वक सैन्य एवं अर्द्धसैन्य गतिविधियों में संलिप्त है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है जब एक दिन पहले अमेरिका के उच्च राजनयिक ने अपने क्षेत्र में चीनी आक्रामकता का जोरदार विरोध करने के लिए भारत के कदम का समर्थन किया था।

व्हाइट हाउस ने जारी रिपोर्ट में क्या कहा

व्हाइट हाउस ने रिपोर्ट में कहा, “बीजिंग अपनी बयानबाजी का खंडन करता है और यलो सी, पूर्व और दक्षिण चीन सागर, ताइवान और चीन-भारतीय सीमा क्षेत्रों में उत्तेजक और जबरदस्त सैन्य और अर्धसैनिक गतिविधियों में संलग्न होकर अपने पड़ोसियों के लिए प्रतिबद्धताओं का पालन करता है।”

दरअसल, चीन से लगी भारत की सीमा पर तनाव के बीच अमेरिका ने नयी दिल्ली का समर्थन किया। एक शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने बीजिंग पर आरोप लगाया कि वह अपने अतिसक्रिय और परेशान करने वाले व्यवहार से यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और उसका विरोध करना चाहिए।

चीन दिखा रहा आक्रामक रुख

अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण और मध्य एशिया ब्यूरो की निवर्तमान प्रमुख एलिस वेल्स ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मुझे लगता है कि सीमा पर जो तनाव है वह इस बात को याद दिलाता है कि चीन आक्रामक रुख जारी रखे हुए है।”

वेल्‍स ने आगे कहा, ‘चाहे वह दक्षिण चीन सागर हो, या भारत से लगी सीमा, हम चीन की ओर से उकसाने वाला और परेशान करने वाला व्यवहार लगातार देख रहे हैं। यह इस बारे में सवाल खड़े करता है कि चीन अपनी बढ़ती शक्ति का इस्तेमाल किस तरह से करना चाहता है।’ वाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका खुली और मुक्त व्यवस्था के साझा सिद्धांतों का समर्थन करने के लिए विदेशी सहयोगियों, साझेदारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहकारी साझेदारी और सकारात्मक विकल्प तैयार कर रहा है।

चाइना का डबल स्टैंडर्ड वाला बिहेवियर

यूनाइटेड स्टेट्स स्ट्रैटेजिक अप्रोच टू द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना नाम की रिपोर्ट को कांग्रेस के सामने जमा कराया गया है। यह राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम 2019 के लिए आवश्यक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि चीन ताकतवर हो चुका है इसलिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की इच्छा और क्षमता उसके हितों के लिए कथित खतरों को खत्म करने और वैश्विक स्तर पर अपने रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के प्रयासों से डराने और जबरदस्ती करने की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग की कार्रवाई चीनी नेताओं की उन घोषणाओं से अलग है जिसमें उनका कहना है कि वे धमकी या बल प्रयोग का विरोध करते हैं, अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते या शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से विवादों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे एक दिन पहले ट्रंप प्रशासन  के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ एलिस वेल्स ने चीन के व्यवहार को उकसाने और परेशान करने वाला बताया था। 



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