ब्राजील के कब्रिस्तान में लाशें दफनाने की जगह नहीं

रियो

कोरोना… ब्राजील ने रूस को पीछे छोड़ा, देश में संक्रमण से अब तक 21000 से ज्यादा मौतें

ब्राजील ने कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले में रूस को भी पीछे छोड़ दिया है और अब दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा संक्रमण से प्रभावित देश बन गया है। ब्राज़ील के साओ पालो शहर के सबसे बड़े कब्रिस्तान में लाशें दफनाने की जगह नहीं है। यहां शुक्रवार को संक्रमण के करीब 20,000 नए केस सामने आए जो कि अब तक का रिकॉर्ड है। ब्राजील में अभी तक संक्रमण के 3,30,800 मामले सामने आए हैं और 21,000 से भी ज्यादा लोगों की इससे मौत हो गई है। यहां इतनी मौतों के बाद सड़कों पर लाशें रखीं देखीं जा सकती हैं, अस्पतालों और कब्रिस्तानों में भी लाशों का ढेर लगा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दक्षिण अमरीका महामारी का नया केंद्र बन गया है। दक्षिण अमरीकी देश ब्राजील कोविड-19 की महामारी से सबसे ज्यादा देशों में से है। डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन विशेषज्ञ डॉक्टर माइक रेयान ने बताया, ‘एक तरह से दक्षिण अमरीका इस महमारी का नया केंद्र बन गया है और ब्राज़ील यकीनन वहां सबसे ज्यादा प्रभावित है।’ ब्राजील में विपक्ष और कई बड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्राजील में ये स्थिति राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो के अड़ियल रवैये के चलते पैदा हुई है।

डॉक्टर्स ने कहा-अस्पतालों में बेड ही नहीं

ब्राजील दुनिया में ऐसा छठा देश है जहां पर कोविड-19 के कारण 20,000 से अधिक मौतें हुई हैं और वहां को लेकर ये चेतावनी भी जारी की गई है कि ये संकट अभी तक अपने उच्चतम स्तर तक नहीं पहुंचा है। इसके बावजूद राष्ट्रपति जेर बोलसोनारो ने स्थिति की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया है। उत्तरी ब्राज़ील के एक अस्पताल में नर्स जोआओ आलो ने बीबीसी से बताया कि अमेज़न प्रांत में मनौस सिर्फ़ ऐसी जगह है जहां पर आईसीयू है और यहां पर सभी लोगों के लिए बेड नहीं हैं इसके कारण बहुत सारे लोग मर रहे हैं। मेरी आईसीयू यूनिट में हमारे चार डॉक्टर कोविड-19 पॉज़िटिव पाए गए हैं। हमारी एक नर्स आईसीयू में वेंटिलेटर पर हैं।

स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने है चार अस्पताल

साओ पाउलो के अस्पताल में डॉक्टर लेतिसिया कवानो ने बताया कि ‘शहर में बने अस्थाई अस्पतालों में अधिक गंभीर मामले आ रहे हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में हमने चार अस्पताल बनाए हैं। दुर्भाग्यवश, ब्राजील उन लोगों में बंट गया है जो संघीय सरकार पर भरोसा करते हैं और वो लोग जो विज्ञान का पालन करते हैं। हमारे राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली सरकार ने साफ संदेश दिया है कि सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी नहीं है यहां तक कि कोविड-19 वास्तव में मौजूद है।’

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