दस साल मंत्री रहे नेताओं को नहीं मिलेगा मौका

धर्मेंद्र पैगवार | भोपाल

लगातार मंत्री रहे नेताओं को फिर मौका देने से उपचुनाव में सत्ता विरोधी लहर का डर, नए चेहरों को मौका देने का दिल्ली ने किया फैसला

शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर अब सारे सूत्र पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अपने हाथ में ले लिए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से नेतृत्व ने इस संबंध में पूरी बात कर ली है। पार्टी आलाकमान ने तय किया है कि पिछले 10 साल से जो नेता लगातार मंत्री रहे हैं उन्हें विश्राम दिया जाए और नई लीडरशिप तैयार की जाए। यह क्राइटेरिया कई बड़े नेताओं के लिए मुसीबत बन गया है। मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना 1 जुलाई को थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 12 समर्थकों को मंत्री बनाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं इस कारण विस्तार अब दो या 3 जुलाई को होगा। भाजपा में दो बड़े नेताओं के बीच चल रही उठापटक के कारण भी तारीख आगे बढ़ी है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दो दिन बाद मंगलवार को भोपाल लौट आए। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अभी दिल्ली में ही हैं। इन सभी नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, धर्मेंद्र प्रधान के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया से कई दौर की चर्चा की है।

इन सभी बैठकों और चर्चाओं के बाद यह तय हुआ है कि मंत्रिमंडल की अंतिम सूची केंद्रीय नेतृत्व ही तय करेगा। उसने मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश से जुड़े सभी नेताओं की बात सुन ली है। एक दिन पहले प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री बनाने की बात भी आई थी। सिंधिया अपने किसी समर्थक को डिप्टी सीएम चाहते हैं, यह बात सामने आते ही नरोत्तम मिश्रा कैंप ने भी मिश्रा को डिप्टी सीएम बनाने की बात आगे बढ़ाई। हालांकि डिप्टी सीएम की बात को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरी तरह खारिज कर दिया। सूत्र बताते हैं कि आलाकमान मध्य प्रदेश में अलग-अलग पावर सेंटर बनाकर सरकार और संगठन में गुटबाजी नहीं चाहता है। उसका लक्ष्य मध्यप्रदेश में अच्छी सरकार देकर 2023 का चुनाव है।

सिंधिया चाहते हैं 12 मंत्री…

कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया अपने 12 समर्थकों को मंत्री बनवाना चाहते हैं। यही एक बड़ी वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार 1 जुलाई को नहीं हो सका। सिंधिया जब भाजपा में आए थे तब प्रदेश की कांग्रेस सरकार में उनके 5 समर्थक मंत्री थे। तब भाजपा नेतृत्व ने इन पांचों को मंत्री बनाने का वादा किया था। बाद में बिसाहूलाल सिंह, इंदल सिंह कंसाना, हरदीप सिंह डंग के अलावा राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के नाम भी जुड़ गए। इन नौ नेताओं के अलावा सिंधिया तीन और नाम मंत्रिमंडल की सूची में जुड़वाना चाहते हैं जिस पर भाजपा नेतृत्व तैयार नहीं है। इसको लेकर सिंधिया ने मंगलवार को भी नड्डा और शाह के साथ बैठक की। सिंधिया के मंगलवार दोपहर भोपाल आने का प्रोग्राम था जिसे स्थगित कर दिया गया।

रामपाल और शुक्ला को करना पड़ सकता है इंतजार

भाजपा प्रदेश सरकार में नए चेहरों को देखना चाहती है। क्योंकि पुराने चेहरों और मंत्रियों से जनता में नाराजगी है। लिहाजा 10 साल से मंत्री रहे नेताओं को आराम दिया जाएगा। उनकी जगह उनके ही अंचलों से जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। इस क्राइटेरिया में गोपाल भार्गव, राजेंद्र शुक्ला, रामपाल सिंह आ रहे हैं।

मेंदोला, मोहन यादव का नाम तय, केदार शुक्ला को भी मौका!

मालवा से रमेश मेंदोला के अलावा मोहन यादव का नाम तय है। विंध्य से केदार शुक्ला या गिरीश गौतम को मौका मिल सकता है। अजय विश्नोई, सुरेंद्र पटवा, विश्वास सारंग, संजय पाठक भी शपथ ले सकते हैं। चंबल से सिंधिया कैंप मंत्रियों के अलावा भाजपा से अरविंद भदौरिया का नाम भी लगभग तय है। प्रेम सिंह, रामखेलावन पटेल, चेतन कश्यप नया चेहरा हो सकते हैं।

विभाग भी दिल्ली तय करेगा : भाजपा के सूत्र बताते हैं कि आलाकमान ने सभी निर्णय स्वयं ही करने का फैसला किया है। ताकि मध्य प्रदेश के नेताओं में यह संदेश नहीं जाए कि वह किसी नेता या गुट को उपकृत कर पाए हैं। मंत्रियों के नाम बुधवार दोपहर तक देख कर लिए जाएंगे। कौन से विभाग सिंधिया कैंप के मंत्रियों को दिए जाएं और भाजपा संगठन में लगातार काम कर रहे नेताओं को कौन से विभाग देकर सरकार और संगठन की छवि उजली की जाए, यह दिल्ली ही तय करेगा।

 

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