गैंगस्टर को दुकान पर देखते ही पहचान लिया सुरेश ने

धर्मेंद पैगवार | उज्जैन/भोपाल

हीरो बना पूजा सामग्री बेचने वाला

कुख्यात विकास दुबे को पुलिस और देश की खुफिया एजेंसियां नहीं ढूंढ पाई, लेकिन उसे उज्जैन में महाकाल मंदिर के सामने पूजा सामग्री बेचने वाले सुरेश कहार ने पहचान लिया। गुरुवार सुबह दुबे को सुरेश कहार की निशानदेही पर ही पकड़ा गया। उज्जैन पुलिस और राजनेता श्रेय लेने की होड़ में उलझे हैं, लेकिन सुरेश ने वह कर दिखाया है जिससे वह हीरो बन गया है।

दुबे पर पांच लाख रुपए का इनाम घोषित है। उसकी तलाश उत्तर प्रदेश दिल्ली और हरियाणा में की जा रही थी और वह निकला उज्जैन में। जब 5 साथी एनकाउंटर में मारे गए तो दुबे को गिरफ्तारी के लिए सबसे मुफीद जगह उज्जैन लगी। हो सकता है कि लोगों की नजर में आने की कहानी खुद उसी ने रची हो और उसका समर्पण, गिरफ्तारी नाटक हो।

सुरेश ने ‘प्रजातंत्र’ को बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे एक व्यक्ति उसके पास वीआईपी टिकट काउंटर का पता पूछने आया था। सुरेश की दुकान महाकाल मंदिर परिसर के ठीक सामने वीआईपी गेट के नजदीक ही है। सुरेश पूजन सामग्री के अलावा बाबा महाकाल को चढ़ने वाली पगड़ी भी बनाता है। जिन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी वीआईपी दर्शन के लिए होती है वह सुरेश के संपर्क में रहते हैं। पता पूछने वाले व्यक्ति को देखते ही सुरेश का माथा ठनका। उसे लगा कि इस आदमी को उसने टीवी पर देखा था। सुरेश ने एक बार उसे फिर गौर से देखा और उसे मंदिर में अंदर जाने के लिए कहा। इसके तुरंत बाद सुरेश ने लोकायुक्त पुलिस के आरक्षक घनश्याम मिश्रा को फोन किया। महाकाल पुलिस चौकी को सूचना देने के बाद दुबे को पकड़ लिया गया।

प्रशासन ने लिए सुरेश के बयान

सुरेश को नहीं मालूम कि उसने कितना बड़ा काम कर दिया है। वास्तव में विकास दुबे के ऊपर जो पांच लाख रुपए का इनाम है, उसका फायदा सुरेश को ही मिलना चाहिए। दुबे के पकड़ आने के बाद मंदिर और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने सुरेश से विस्तृत बातचीत की है।

श्रेय दिया उज्जैन पुलिस को

हालांकि दुबे की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाने वाले सुरेश कहार का नाम अभी तक प्रशासन ने नहीं लिया है। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक उज्जैन पुलिस को बधाई दे रहे हैं। उज्जैन पुलिस के अफसरों ने भी अभी तक पुलिस मुख्यालय को सुरेश की कहानी नहीं बताई है।

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