यूपी एसटीएफ दुबे को लेने ही नहीं आई उज्जैन पुलिस को जाना पड़ा झांसी तक

विनोद सिंह | उज्जैन

कानून का एनकाउंटर | सरेंडर कर विकास दुबे ने की थी खुद को बचाने की कोशिश, लेकिन… योगी सरकार ने राजनैतिक दबाव से ऐसे विफल की योजना… पूरी कहानी सिर्फ प्रजातंत्र में…

यूपी के दुर्दांत गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर की कहानी उसके सरेंडर के तुरंत बाद लखनऊ में लिख दी गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बात से नाराज़ थे कि दुबे ने मध्यप्रदेश जाकर सरेंडर कर दिया। यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से बात की और फिर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाया गया कि उज्जैन पुलिस उसे कोर्ट में पेश ना करे। प्रोडक्शन वारंट लेकर कानूनी जिम्मेदारी लेने के बजाय सिर्फ पंचनामा बनाकर यूपी पुलिस को सौंप देना तय हुआ। इतना ही नहीं उज्जैन पुलिस को ही कहा गया कि वह यूपी बॉर्डर (झांसी ) तक दुबे को छोड़ दे, जहां से यूपी एसटीएफ उसे ले लेगी।

कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुलिसवालों को मौत की नींद सुलाने वाला गैंगस्टर विकास दुबे गुरुवार को महाकाल मंदिर से नाटकीय तरीके से पकड़ा गया था। मंदिर के सिक्योरिटी गार्ड ने ही उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। विकास दुबे के इस तरह मंदिर से पकड़ाने और पुलिस की बुनी कहानी पर मीडिया लगातार सवाल उठा रहा था। विकास दुबे को लेकर उज्जैन पुलिस गुरुवार को दिनभर परेशान रही। माना जा रहा था कि एक सुनियोजित प्लान के मुताबिक विकास महाकाल मंदिर आया था। इसके मुताबिक उज्जैन में पकड़ाने पर उसे उज्जैन कोर्ट में पेश करने की तैयारी थी। ऐसा होने पर यूपी एसटीएफ को विकास दुबे को ले जाने के लिए हर हाल में कोर्ट जाना पड़ता। यहां से प्रोडक्शन वारंट जारी होता और उसे पूरी हिफाजत के साथ विकास दुबे को पूछताछ के लिए ले जाना होता। पूछताछ के बाद उसे पूरी हिफाजत से उज्जैन कोर्ट को सौंपना भी होता। ऐसी स्थिति में उसके एनकाउंटर की आशंका शून्य हो जाती।

गुरुवार… महाकाल मंदिर उज्जैन

उज्जैन में विकास दुबे के पकड़ाने के बाद यूपी का राजनीतिक नेतृत्व खासा नाराज था। माना जा रहा था कि दोनों राज्यों में एक ही दल का नेतृत्व होने के बाद भी आपसी समन्वय की कमी इस मामले में हुई। ऐसे में यूपी नेतृत्व ने हाईकमान से मध्यप्रदेश नेतृत्व पर दबाव बनाया, इसके चलते ही विकास दुबे की उज्जैन कोर्ट में पेशी को ना सिर्फ टाला गया, बल्कि उज्जैन में केस रजिस्टर्ड करने के बजाय पंचनामा बनाकर उसे यूपी एसटीएफ को सौंपने का फैसला किया गया। इतना ही नहीं, यूपी एसटीएफ ने उज्जैन से विकास दुबे को ले जाने के बजाय यूपी बार्डर तक उसे भेजने की जिम्मेदारी भी उज्जैन पुलिस पर डाल दी। इसी के चलते सीएसपी माधवनगर रजनीश काश्यप विकास दुबे को गुरुवार शाम करीब 4 बजे उज्जैन से लेकर निकले और रात 12 बजे झांसी बार्डर पर यूपी एसटीएफ एवं पुलिस को उसे सौंप दिया।

शुक्रवार… कानपुर का सरकारी अस्पताल

कानपुर के नजदीक 5 बजे पहुंची एसटीएफ, एनकाउंटर 6.30 पर… डेढ़ घंटे क्या हुआ?

उज्जैन से विकास दुबे को कानपुर वाया झांसी होते हुए ले जाया जा रहा था। उज्जैन से झांसी की दूरी 464 किलोमीटर है और सड़क से यह दूरी तय करने में लगभग 8.30 घंटे लगते हैं। उज्जैन पुलिस शाम 4 बजे विकास को लेकर निकली थी। इस हिसाब से उज्जैन पुलिस झांसी बार्डर पर रात करीब 1 बजे के लगभग पहुंची थी। यहां विकास दुबे के ट्रांसफर में करीब 15 मिनट का समय लगा। यहां से यूपी एसटीएफ विकास को लेकर कानपुर के लिए निकली थी। झांसी से कानपुर की दूरी 228 किलोमीटर है और यह दूरी 4.30 घंटे में तय होती है। इस हिसाब से कानपुर के नजदीक यूपी एसटीएफ करीब 5 बजे के आसपास पहुंच गई थी। सुबह 6.30 बजे विकास एनकाउंटर में मारा गया।

एसएसपी का वायरल ऑडियो भी चर्चा में

एएसपी उज्जैन शहर रूपेश द्विवेदी का एक आडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि ‘आई होप विकास दुबे कानपुर नहीं पहुंच पाएगा।’

एसटीएफ ने एनकाउंटर को ऐसे समझाया

यूपी एसटीएफ का कहना है कि गाय भैंसों का झुंड सामने आकर पुलिस की गाड़ी पलटी थी। मौके का फायदा उठाकर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने पिस्टल छीन भागने का प्रयास किया।दुबे ने पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाईं, जवाबी फायरिंग में विकास को लगी गोली, गई जान। वाहन पलटने से 5 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि दुबे की फायरिंग में 2 एसटीएफ जवान जख्मी

 

 

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