राफेल को फ्रांस से भारतीय वायुसेना के पांच पायलट उड़ाकर ला रहें हैं

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

भारतीय सशस्त्र बलों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। सोमवार को फ्रांस के एयरबेस से पांच राफेल लड़ाकू विमान ने भारत के लिए उड़ान भर ली है।

इन विमानों को भारतीय वायुसेना के पायलट उड़ा रहे हैं और ये रीफ्यूलिंग के लिए संयुक्त अरब अमीरात के अल धाफरा एयरबेस पर रुकेंगे।

उन जाबांज पायलट्स की तस्वीरें भी आई हैं

फ्रांस से इन फाइटर जेट्स के भारत आने की कुछ तस्वीरें और वीडियोज भी सामने आए हैं। उन जाबांज पायलट्स की तस्वीरें भी आई हैं जो इन्हें उड़ाकर, इतना लंबा सफर तय करके भारत लानेवाले हैं।

दरअसल, आज 5 राफेल विमानों के बैच ने फ्रांस से भारत के लिए उड़ान भर दी है। राफेल विमान बुधवार यानी 29 जुलाई को हरियाणा के अम्बाला स्थित एयर फोर्स स्टेशन पर लैंड करेंगे। राफेल को अगले महीने को वायुसेना में शामिल किया जाएगा।

जरूरत पड़ने पर राफेल विमान को भारत चीन विवाद के बीच लद्दाख में एक हफ्ते के भीतर तैनात भी किया जा सकता है जबकि इसमे 6 महीने तक का समय लगता था।

पायलटों को फ्रेंच एविएटर्स द्वारा प्रशिक्षित किया जाना है

भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के अनुसार, दोनों देशों को कुल 36 वायुसेना पायलटों को फ्रेंच एविएटर्स द्वारा राफेल लड़ाकू जेट पर प्रशिक्षित किया जाना है। जहां अधिकांश वायुसेना के पायलटों को फ्रांस में प्रशिक्षित किया जाएगा, वहीं कुछ भारत में अभ्यास करेंगे।

खास बात ये है कि इन विमानों को भारतीय पायलट ही उड़ाकर ला रहे हैं। पहली खेप में भारत को 10 लड़ाकू विमान डिलीवर किए जाने थे लेकिन विमान तैयार न हो पाने की वजह से फिलहाल पांच विमान भारत पहुंचेंगे।

दोनों स्टेशनों पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं

इन विमानों की पहली स्क्वाड्रन को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा, जिसे भारतीय वायुसेना का सबसे अहम रणनीतिक बेस माना जाता है। वहीं, दूसरा रणनीतिक बेस पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में होगा। कोरोना महामारी के बावजूद वायुसेना कड़ी मेहनत से जमीनी ढांचे को तैयार कर रही है, ताकि विमानों को यहां से संचालित किया जा सके।

वायुसेना ने राफेल के रखरखाव और तैनाती के लिए दोनों स्टेशनों पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कुल 36 राफेल में से 30 लड़ाकू विमान हैं, जबकि छह ट्रेनर विमान हैं। ट्रेनर विमान दो सीटों वाले हैं। उनमें लड़ाकू विमानों जैसी ही खासियत होगी।

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