मायावती के इस बयान से राजस्थान की सियासी बाजी पलटती हुई नज़र आ रही है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान के राजनीतिक संकट पर मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत पर करारा हमला बोला।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने राजस्थान चुनाव के बसपा विधायकों का विलय कर लिया। हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। कांग्रेस को सबक सिखाना जरूरी है।

विधायक कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट करेंगे

मायावती की नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी भी सुर्खियों में है। वजह है बीते साल कांग्रेस में शामिल हुए सभी छह विधायकों के खिलाफ कोर्ट का रुख करना।

अपने 6 विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हुए मायावती ने कहा कि सभी विधायक कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट करेंगे। उन्होंने गहलोत सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद बीएसपी ने बिना शर्त कांग्रेस को समर्थन दिया, लेकिन बदनीयती से सभी विधायकों का विलय करवा लिया गया था।

गहलोत सीएम बनने के बाद अपनी बदनीयती दिखाई थी

मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए मायावती ने कहा, “राजस्थान चुनाव का नतीजा आने के बाद बीएसपी ने कांग्रेस को बिना शर्त के समर्थन दिया था। दुख की बात है की गहलोत ने सीएम बनने के बाद बदनीयती से बीएसपी को राजस्थान में क्षति पहुंचाने के लिये विलय करने की गैरकानूनी कार्रवाई की थी। यही कृत्य पिछली सरकार में भी किया गया था।”

मायावती ने आगे कहा कि बीएसपी को बार-बार धोखा दिया गया है। गहलोत को सबक सिखाया जा सकता है। इस मामले को ठंडा नहीं होने दिया जाएगा और मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। कांग्रेस जो गैरसंवैधानिक काम कर रही है, उसे सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे।

मायावती के नए दांव से गहलोत खेमा फ़िलहाल बेचैन है

छह विधायकों को विधानसभा में कांग्रेस के खिलाफ मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया, जिससे राजस्थान की सियासी बाजी पलटती हुई नजर आ रही है। बसपा प्रमुख मायावती के नए दांव से सीएम अशोक गहलोत खेमा फ़िलहाल बेचैन हो गया है।

बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा, “सभी छह विधायकों को अलग-अलग नोटिस जारी करके सूचित किया गया कि चूंकि बसपा एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी है और संविधान की दसवीं अनुसूची के पारा चार के तहत पूरे देश में हर जगह समूची पार्टी (बसपा) का विलय हुए बगैर राज्य स्तर पर विलय नहीं हो सकता है।”

अब मामला कोर्ट पहुंच गया है

बसपा छोड़ने वाले सभी 6 विधानसभा सदस्यों के स्पीकर ने भले ही कांग्रेस सदस्य के तौर पर मान्यता दे दी है, लेकिन अब मामला कोर्ट पहुंच गया है। बसपा से कांग्रेस में विधायक का मामला दलबदल और विलय के बीच फंसता नजर आ रहा है।

वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने व्हिप जारी कर खुलकर कांग्रेस के खिलाफ उतर आई हैं, जिससे कांग्रेस खेमे में बेचैन बढ़ी जबकि बीजेपी को इसमें अपना सियासी फायदा दिख रहा है।

कांग्रेस सदस्यों की संख्या बढ़कर 107 हो गई थी

2018 के चुनाव में संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुधा बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने पिछले साल 16 सितंबर को कांग्रेस में एक समूह के रूप में विलय के लिए अर्जी दी थी।

विधानसभा स्पीकर ने अर्जी पर दो दिन बाद ही आदेश जारी करके कहा था कि इन छह विधायकों से कांग्रेस के सदस्य की तरह व्यवहार किया जाए। बसपा विधायकों के विलय से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को मजबूती मिली और 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या बढ़कर 107 हो गई थी।

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