दुनिया के 80 करोड़ बच्चों के खून में घुल रहा सीसा का जहर

पुर्तगाल (संयुक्त राष्ट्र)

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के लगभग तीन चौथाई बच्चे सीसा (लीड) धातु के जहर के साथ जीने को मजबूर हैं। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के सीसा धातु से प्रभावित होने की वजह एसिड बैटरियों के निस्तारण को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही है। इसकी वजह से यूनिसेफ ने इस तरह की लापरवाही के प्रति आगाह करते हुए इसको तत्काील बंद करने की अपील भी की है।

यूनिसेफ और प्योलर अर्थ की द रिपोर्ट – द टॉक्सिक ट्रूथ : चिल्ड्रन्स एक्सपोजर टू लीड पाल्यूशन अंडरमाइंस ए जनरेशन ऑफ पॉटेंशियल के नाम से सामने आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर के करीब 80 करोड़ बच्चों के खून में इसकी वजह से इस जहरीली सीसा धातु का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज्या दा है। यूनिसेफ की इस रिपोर्ट में बच्चों की जितनी संख्या बताई गई है उसके मुताबिक दुनिया का हर तीसरा बच्चा इस जहर के साथ जी रहा है। यूनिसेफ ने आगाह किया है कि खून में सीसा धातु के इतने स्तर पर मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इस रिपोर्ट की दूसरी सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात ये भी है कि इस जहर का मजबूरन सेवन करने वाले आधे बच्चे दक्षिण एशियाई देशों में रहते हैं।

शुरुआती लक्षण नहीं आते नजर

यूनीसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोर के मुताबिक खून में सीसा धातु की मौजूदगी के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं और ये धातु खामोशी के साथ बच्चों के स्वास्थ और विकास को बर्बाद कर देती है।

रिपोर्ट में पांच देशों का किया जिक्र

रिपोर्ट में पांच देशों की वास्तविक परिस्थितियों का मूल्यांकन भी किया गया। इनमें बांग्लांदेश के कठोगोरा, जियार्जिया का तिबलिसी, घाना का अगबोगब्लोशी, इंडोनेशिया का पेसारियान और मैक्सिको का मोरोलॉस प्रांत शामिल है। इसमें कहा गया कि सीसा धातु में न्यूरोटॉक्सिन होता है जिनके कारण बच्चे के मस्तिष्क को वो नुकसान पहुंचता है। इसका इलाज भी संभव नहीं है।

बैटरियों के डिस्पोजल की कोई व्यवस्था नहीं

रिपोर्ट में पाया गया है कि इस तरह की आय वाले देशों में बैटरियों के सही डिस्पो जल की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा इनकी री-सायकिलिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जो इस समस्या का सबसे बड़ा कारण है। यही बच्चों में सीसा धातु का जहर फैलने का एक बहुत बड़ा कारण भी है। इन देशों में वाहनों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ बैटरियों का कचरा भी काफी निकल रहा है।

 

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