अब भारत के आईटी पेशवर यूएस में नहीं कर पाएंगे नौकरी

नई दिल्ली

बड़ा झटका… ट्रंप ने एच-1बी वीजा धारकों को नौकरी देने से रोकने संबंधी सरकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर, अमेरिकियों को मिलेेंगे अवसर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों द्वारा एच-1बी वीजा धारकों को नौकरी देने से रोकने संबंधी सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह अमेरिका में नौकरी करने के इच्छुक भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ा झटका है। इस मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं एक सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रहा हूं, इससे संघीय सरकार द्वारा अमेरिकियों को नौकरी देने के सरल नियम का अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा।” ट्रंप ने कहा कि हमारा प्रशासन सस्ते विदेशी श्रम के बदले में मेहनती अमेरिकियों को नौकरी से बाहर करने की कार्रवाई को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम एच-1बी नियमन को अंतिम रूप दे रहे हैं जिससे अब किसी भी अमेरिकी कर्मचारी को बदला नहीं जाएगा। एच-1बी का इस्तेमाल अमेरिकियों के लिए रोजगार सृजन के लिए होगा। इसका इस्तेमाल शीर्ष ऊंचा वेतन पाने वाली प्रतिभाओं के लिए किया जाएगा।” इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा और अन्य प्रकार के विदेशी कार्य वीजा को 2020 के अंत तक स्थगित कर दिया था। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां तकनीकी या अन्य विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती हैं। हर साल इस वीजा के आधार पर चीन और भारत से हजारों पेशेवरों की नियुक्ति होती हैं।

क्या है एच-1बी वीजा

एच-1बी वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों में काफी लोकप्रिय है। यह एक गैर-आव्रजक वीजा है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां तकनीकी या अन्य विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती हैं। अमेरिका की प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां हर साल इस वीजा के आधार पर चीन और भारत से हजारों पेशेवरों की नियुक्ति करती हैं।

वीजा की प्रत्येक वित्त वर्ष में वार्षिक सीमा 65 हजार

फ्लोरिडा के प्रोटेक्ट यूएस वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन की संस्थापक सारा ब्लैकवेल, टेनेसी वैली अथॉरिटी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर जोनाथन हिक्स तथा पेंसिल्वेनिया के यूएस टेक वर्कर्स के संस्थापक केविन लिन शामिल हैं। अमेरिका में एच-1बी वीजा की प्रत्येक वित्त वर्ष में वार्षिक सीमा 65,000 की है। अब 120 दिन के अंदर ऑडिट कर देखना होगा कि क्या वे सिर्फ अमेरिकी नागरिकों और नागरिकता वाले लोगों को ही प्रतिस्पर्धी सेवाओं में नियुक्ति की जरूरत के नियम का अनुपालन कर रही हैं।

अमेरिका में एसटीईएम के कुशल जानकारों की भारी कमी

नास्कॉम ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकारी आदेश ‘एलाइंग फेडरल कॉन्ट्रैक्टिंग एंड हायरिंग प्रैक्टिसेज विद द इंट्रेस्ट ऑफ द अमेरिकन वर्कर्स’ गलत धारणाओं और गलत सूचनाओं के आधार पर जारी किया गया है।” नास्कॉम ने कहा कि यह आदेश ऐसे समय में आया है जबकि अमेरिका में एसटीईएम के कुशल जानकारों की भारी कमी है, और जिसकी भरपाई करने का काम एच-1बी और एल-1 जैसे अल्पकालिक गैर-प्रवासी वीजाधारक करते हैं।

 

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