दिल्ली से फोन आते ही शुरू हुई आरती, सीआरपीएफ जवान भी गाते रहे- भये प्रकट कृपाला दीनदयाला…

चन्द्रकान्त जोशी

1992 की रामकथा जिसकी पटकथा लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी ने लिखी थी आज मुकाम पर पहुंची, अब नई कथा की शुरुआत प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बुधवार को हुई।

सीआरपीएफ जवान के सभी कारसेवकों के साथ मुझे भी अयोध्या छोड़ देने के हुकुम के बीच मुझमें अचानक हिम्मत आ गई और मैंने कहा कि मैं कार सेवक नहीं हूँ, पत्रकार हूँ। मैं तो शाम से यहीँ फँस गया और मेरे साथी ढाँचा टूटते ही बिछड़ गए और मैं यहीं रह गया। इस पर वो मुझे पास के ही सीआरपीएफ के कैंप में अपने वरिष्ठ अधिकारी के पास ले गया। उस अधिकारी ने मुझसे पूछा कि रात भर में यहाँ क्या हुआ, कौन-कौन आया था। तो मैंने कहा कि मैं तो खुद उज्जैन से आया हूँ, मैं यहाँ किसी को नहीं जानता। मेरी बातों से वो अधिकारी संतुष्ट नजर आया और उसने मेरे लिए चाय मंगवाई और कहा कि तुम हमारा एक काम करना अगर कोई कार सेवक कहीं छुपे हुए हों तो हमको बता देना क्योंकि हम पूरा अयोध्या और फैजाबाद बाहर के लोगों से खाली करवाना चाहते हैं।

चाय पीकर मैं वापस भजन गाने वालों के बीच बैठ गया। जैसे-तैसे सुबह हुई। फिर भी मुझे लग रहा था कि यहाँ कुछ अनहोनी होने वाली है। मन में एक अजीब सा डर और रोमांच पैदा हो गया था।

अब जरा दिल थामकर बैठिये, इस जगह पर जहाँ रात भर भजन-कीर्तन और रामायण पाठ चला, वहाँ अब एक नया इतिहास करवट लेने वाला था। इसका अंदाजा वहाँ मौजूद गिने चुने लोगों, मुझे और चारों ओर गिद्ध दृष्टि से हर एक को घूरते हुए पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों को भी नहीं था।

सुबह 7 बजे राम लला का पुजारी हाथों में पूजा की थाल, पूजा सामग्री घंटी, घड़ियाल और चिमटा लेकर आया। उसने जैसे ही राम लला की मूर्ति की ओर कदम बढ़ाया। वहाँ मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि तुम मूर्तियों के पास नहीं जा सकते। यहाँ बता दूँ कि राम लला की मूर्तियों को कनात और कपड़े में ढंकने के साथ ही वहाँ दो-तीन फीट ऊंची दीवार भी रातोंरात बना दी गई थी। इस पर पुजारी ने कहा कि क्यों नहीं जा सकते मैं तो रोज ठाकुरजी की पूजा और आरती करता हूँ। तो सुरक्षा कर्मी ने कहा कि रोज करते होगे आज तो वो हमारी निगरानी में हैं। इस पर पुजारी ने कहा, आप निगरानी करो, मैं तो पूजा करुंगा। यह बहस बहुत तीखी हो रही थी। इस पर पुजारी ने चिल्लाकर कहा, अगर मुझे पूजा नहीं करने दी तो मैं शंख और चिमटे बजाकर सब अखाड़े वालों साधु-संतों को बुला लाउंगा, फिर तुम जानना।

ये सुनकर वो सुरक्षाकर्मी घबरा गया। उसने कहा, रुको मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों से बात करता हूँ। पुजारी ने कहा जल्दी करो, मेरी पूजा और आरती का समय हो रहा है। उस अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को वायरलैस सैट पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इस घटना ने ने मेरी उत्सुकता बढ़ा दी। थोड़ी ही देर में वरिष्ठ अधिकारी ने वायरलैस पर सूचना दी जो मैंने भी अपने कानों से सुनी, दिल्ली बात हो गई है, वहाँ से कहा गया है कि पूजा और आरती में कोई विघ्न न डाला जाए। ये सुनते ही पुजारी सहित सभी सुरक्षा कर्मी और दूसरे लोग खुशी से उछल पड़े। सबने इतनी जोर से जयश्री राम का नारा लगाया कि आसपास के पंछी पेड़ों से उड़ गए।

अगला दृश्य तो और भी रोमांचक था। पुजारी आरती कर रहा था, और जो सुरक्षा सैनिक पूजा करने से रोक रहे थे, वो अपने जूते और चमड़े के बेल्ट उतारकर आरती गा रहे थे। अंदर पूजा चल रही थी और बाहर सुरक्षा में लगे सैनिक गा रहे थे – भये प्रकट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी, भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी। भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥

ऐसा लग रहा था मानो तुलसी दासजी ने ये आरती और छंद इसी दिन के लिए ही लिखा था। इस आरती के बाद सबने श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम आरती गाकर पूजा का समापन किया।

लेकिन एक दृश्य देखकर मैं भी चौंक गया। जो सुरक्षा कर्मी पुजारी को आरती करने से रोक रहा था उसकी आँखोँ से अविरल आँसू बह रहे थे, वह अपने साथी से कह रहा था आज मैं बहुत बड़े पाप से बच गया अगर अज मेरी वजह से यहाँ आरती और पूजा नहीं होती तो मैं किसी को मुँह दिखाने काबिल नहीं रहता। उसका दूसरा साथी भी भीगी आँखों से उसे समझाने की कोशिश कर रहा था। मंैने देखा कि सभी सुरक्षा सैनिकों की आँखें भीगी हुई थी और वे बार-बार अपने आँसू रोकने का प्रयास कर रहे थे।

इधर आरती का समापन हुआ और थोड़ी ही देर में फैजाबाद के निलंबित जिलाधीश आर. एन श्रीवास्तव और एसएसपी डीबी रॉय भी वहाँ आ पहुँचे, दोनों ने प्रसन्न मन से राम लला के दर्शन किए।

अब आपको दो रहस्य और बता देना चाहता हूँ। पहला तो ये कि ढाँचे मलबे में से राम लला की मूर्तियाँ सुरक्षित कैसे निकाल ली गई। इसकी मैने खोजबीन की तो पता चला कि ढाँचे के टूटने का अंदेशा होते ही राम लला की मूर्तियों की सुरक्षा की व्यवस्था कर ली गई थी।

और आखिरी में एक और चौंकाने वाली बात। सर्वोच्च न्यायालय को उत्तर प्रदेश सरकार और राम जन्म भूमि आंदोलन के नेताओँ ने आश्वासन दिया था कि बाबरी मस्जिद परिसर में कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से तत्कालीन गृह सचिव विनोद ढाल को पर्यवेक्षक बनाया गया था। विनोद ढाल सुबह से लेकर ढाँचा टूटने तक एक वीडियो कैमरा और दूरबीन लिए ढाँचे के बाईँ ओर बनी सीता रसोई (ये भी एक महल जैसा भवन है) की छत पर बैठे थे। विनोद ढाल 1985 में उज्जैन के संभागायुक्त रह चुके थे और उनसे मेरी अच्छी दोस्ती थी। उनसे मंैने पूछा कि आपके सामने ही ढाँचा टूटता रहा और आप कुछ नहीं कर सके। तो उन्होंने चौंकाने वाला उत्तर दिया- मेरा काम ये देखना था कि यहाँ कोई निर्माण कार्य ना हो, टूटने के संबंध में मेरे पास कोई निर्देश नहीं थे।

तो ये है 1992 की रामकथा जिसकी पटकथा लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, साध्वी ऋतुंभरा और मुरली मनोहर जोशी ने लिखी थी, आज एक नई रामकथा शुरु हो रही है जिसकी पटकथा की शुरुआत भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो रही है।
(समाप्त)

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